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अदालत ने चार्ज शीट के बाद जेल में कप्पन के बयान लेने से एसटीएफ को रोका

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मथुरा। पीएफआई सदस्य सिद्दीक कप्पन के जेल में बयान लेने संबंधी प्रार्थनापत्र को एडीजे प्रथम अनिल कुमार पांडे की अदालत ने खारिज कर दिया। एसटीएफ ने कप्पन की हैंडराइटिंग के आगरा की फोरेंसिक लैब द्वारा मिलान न होने की रिपोर्ट के बाद अदालत में जेल में बयान लिए जाने संबंधी प्रार्थनापत्र दिया था।
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हाथरस में दंगा भड़काने के आरोप में मांट पुलिस द्वारा पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) के सदस्य सिद्दीक कप्पन और उसके साथियों को गिरफ्तार किया था। जिसकी जांच एसटीएफ कर रही थी।
एसटीएफ ने इसमें चार्जशीट भी लगा दी थी। इससे पूर्व एसटीएफ द्वारा हॉस्पिटल रोड जंगपुरा दिल्ली स्थित कप्पन के निवास पर 11 नवंबर 2020 को दबिश देकर तलाशी के दौरान प्रतिबंधित संगठन सिम्मी से जुड़ी बुकलेट आदि सामान बरामद किया था, जिसमें मिले कुछ आपत्तिजनक साहित्य को एसटीएफ द्वारा कप्पन की राइटिंग में बताया जा रहा था और इस संबंध में उन्होंने हैंडराइटिंग का मिलान करने के लिए 8 मार्च 2021 को आगरा की फोरेंसिक लैब भेजा था। जहां पर 2 जून को रिपोर्ट मिली कि यह हैंड राइटिंग कप्पन की नहीं है।
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इसके बाद एसटीएफ ने एडीजे प्रथम की अदालत में प्रार्थनापत्र दिया कि हस्तलेख मिलान नहीं होने के बाद कप्पन का जेल में मजीद बयान लेना आवश्यक है। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि इस मामले में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हो चुका है। लिहाजा उनका प्रार्थनापत्र स्वीकार करने योग्य नहीं है।
पीएफआई सदस्य के अधिवक्ता मधुवनदत्त चतुर्वेदी ने बताया कि आगरा की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जांच को भेजे गए सिद्दीक कप्पन की हैंडराइटिंग का नमूना मिलान नहीं हुआ है। एसटीएफ ने जेल में बंद कप्पन का मजीद बयान दर्ज करने के लिए अदालत में प्रार्थनापत्र दिया था। अदालत ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हो जाने का हवाला देते हुए उनकी अर्जी को 16 अगस्त को खारिज कर दिया है।
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