मथुरा। घर के बाहर रैंप बनाने का विरोध करने पर पड़ोसी वृद्ध की गोली मारकर हत्या करने वाले दंपती को जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकास कुमार ने बृहस्पतिवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोनों पर 45 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वारदात के बाद तमाम प्रयास के बाद भी कोर्ट ने हत्यारोपी को जमानत नहीं दी थी।
फरह के गांव महुअन निवासी उमेश कुमार उर्फ मोनी ने पड़ोसी टुंडाराम उर्फ महेंद्र और उसकी पत्नी उर्मिला के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में उन्होंने बताया कि 25 जनवरी 2024 की सुबह 9.20 बजे के टुंडाराम और उनकी पत्नी उर्मिला घर के बाहर रैंप बनवा रहे थे। उनके पिता शिव सिंह ने इसका विरोध किया। इस पर विवाद बढ़ा तो टुंडाराम ने तमंचे से शिव सिंह को गोली मार दी। गोली लगने से शिव सिंह की मौत हो गई। हत्या के बाद पुलिस ने टुंडाराम और उर्मिला को गिरफ्तार कर तमंचा बरामद किया। पुलिस ने दोनों को कोर्ट में पेश किया। यहां से दंपती को जेल भेज दिया। कुछ दिन बाद जिला जज के यहां से उर्मिला को तो जमानत मिल गई, लेकिन कोर्ट ने टुंडाराम को जमानत नहीं दी। कोर्ट ने टुंडाराम पर 25 हजार तथा उर्मिला पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
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साथी जवान की हत्या में टुंडाराम को चुका है आजीवन कारावास
मथुरा। पड़ोसी की हत्या करने वाले टुंडाराम ने सीआईएसएफ में नौकरी के दौरान 13 जुलाई 1992 में सेवा राइफल से साथी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 4 मार्च 2024 को इस मामले में दिल्ली की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कोर्ट उसे आजीवन कारावास की सजा सुना चुकी है। कोर्ट के फैसले के खिलाफ वह दिल्ली हाईकोर्ट में गया। यहां से उसे अपील पर जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद वह अपने गांव आया और इसी दौरान पड़ोसी की गोली मारकर हत्या कर दी। संवाद