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Mathura News: पार्षद बोले- महापौर ने एक बार नहीं कई बार माफी मांगी

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मथुरा। महापौर व पार्षदों की रार में शहर का विकास सिमट कर रह गया है। बीते दिनों सामंजस्य की चर्चाओं के बीच शुक्रवार को फिर से आमने-सामने आ गए। दोनों तरफ से फोन कॉल पर जमकर जुबानी तीर चले। पार्षदों का कहना है कि मंगलवार को महापौर ने पार्षदों से एक बार नहीं कई बार माफी मांगी, लेकिन महापौर इस बात से इन्कार कर रहे हैं। इसी बात को लेकर पार्षदों व महापौर में फोन पर करीब 5 मिनट की बातचीत में जमकर कलह हुई।
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भाजपा पार्षद दल के नेता चौधरी राजवीर सिंह ने बताया है कि महापौर ने बुधवार को 15वीं वित्तीय ग्रांट से विकास कार्यों के प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के लिए अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक बेनतीजा रही। इसके बाद महापौर गोविंद नगर स्थित पार्षद नीरज वशिष्ठ के कार्यालय पहुंचे। यहां पर उन्होंने नीरज वशिष्ठ, ठाकुर तेजवीर सिंह, नीनू कुंजबिहारी भारद्वाज, राकेश भाटिया और ब्रजेश खरे से मुलाकात की।
उन्होंने बताया है कि महापौर ने पांचों पार्षदों से चली आ रही रार को समाप्त करने की बात कही। इसके बाद सभी से एक बार नहीं कई बार माफी मांगी और कहा कि इंसान से गलतियां हो जाती हैं। इसी दौरान मौजूद पार्षदों ने सभी वार्डों में 15वीं वित्त से प्रस्तावित 60-60 लाख रुपये के विकास कार्यों को स्वीकृति प्रदान करने को कहा तो महापौर ने इन्कार कर दिया। महापौर के इस निर्णय से सभी पार्षदों में उबाल आ गया। चंद मिनटों का सामंजस्य एकदम गरमा गया।
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पार्षद दल के नेता और महापौर के बीच करीब 5 मिनट तक फोन कॉल पर तीर चले। बैठक में मौजूद पार्षदों का आरोप है कि महापौर सभी पार्षदों में आपस में फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या है मामला
बीते दिनों पार्षद दल के नेता चौधरी राजवीर सिंह के नेतृत्व में करीब 50 पार्षदों का एक प्रतिनिधिमंडल डीएम सीपी सिंह और एमवीडीए के उपाध्यक्ष एसबी सिंह से मिला था। पार्षदों का आरोप था कि 15वीं वित्त ग्रांट से विकास कार्य कराने जाने के लिए शासन द्वारा करीब 46 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। प्रत्येक वार्ड के लिए 60-60 लाख रुपये जारी करने के निर्देश थे, जबकि महापौर ने 30-30 लाख रुपये की धनराशि ही जारी की है। इसके अलावा 15 करोड़ रुपये आपदा कोष में रखने पर भी पार्षदों ने आपत्ति जताई थी।

सभी वार्डों के पार्षद परिवार का हिस्सा हैं। बीते दिनों नीरज वशिष्ठ के यहां कार्यक्रम था तो वहां जा नहीं पाए थे। इसलिए मंगलवार को उनके कार्यालय पर गए थे। वहां कई और पार्षद बैठे थे। उस दिन सिर्फ 15वीं वित्त ग्रांट से विकास कार्यों पर चर्चा हुई थी। माफी मांगने वाला पार्षदों का आरोप झूठ है। मैं क्यों इनसे माफी मांगूंगा।
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-विनोद अग्रवाल, महापौर
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