ध्यान शिविर में बताई ज्ञान की बातें
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मथुरा-वृंदावन मार्ग स्थित वात्सल्य ग्राम में आयोजित ध्यान शिविर में युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरि महाराज के आशीर्वचन हुए। उन्होंने गुरु की महिमा पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि बच्चे की प्रथम गुरु उसकी मां होती है, क्योंकि जब बच्चा जन्म लेता है तो वह अबोध होता है। उसको बोलना, बैठना, खडे़ होना, चलना सब वही सिखाती है। यदि मां सुशील और संस्कारित है तो बच्चा भी सुशील और संस्कारित होगा। साध्वी ऋतंभरा ने ध्यान की बारीकियां बताईं। उन्होंने कहा कि षट्चक्र की साधना करने वाले की एक दिन कुंडलिनी जाग्रत हो ही जाती है। इसके लिए हमें प्रति दिन कम से कम एक घंटा निरंतर अभ्यास की आवश्यकता रहती है। हमें मन पर काबू करना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सत्य के खोजी के लिए ध्यान करना आवश्यक है।
इस अवसर पर समविद गुरुकुलम एवं कृष्णा ब्रह्मरतन विद्यामंदिर के बच्चों ने गुरु महिमा पर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। आयोजन में महामंडलेश्वर स्वामी ज्योतिर्मयानंद गिरि, संजय भैया, साध्वी साक्षी चेतना, साध्वी शिरोमणि, विभोर प्रकाशम, साध्वी सुहृदया, साध्वी सत्य प्रिया, साध्वी संपूर्णा, स्वामी सत्यशील, उमाशंकर आदि मौजूद रहे।