डीएम साहब! हम घुट-घुट कर मर रहे हैं। कई वर्षों से शहर के बीच पीतल की ढलाई करने वाली भट्टियां धधक रही हैं। इससे निकलने वाला धुआं क्षेत्रीय लोगों की सांसों में जहर का काम कर रहा है। परेशान हो गए हैं, शिकायत करते हुए। कोई अफसर सुनने को तैयार नहीं, पुलिस तो उल्टा शिकायतकर्ताओं को ही हड़का रही है। यह कहना है मथुरा शहरी क्षेत्र के मोहल्ला अर्जुनपुरा निवासी घनश्याम, मदनलाल और मनीष सहित कई लोगों का।
ये लोग अर्जुनपुरा में अवैध रूप से चल रही पीतल ढलाई की भट्टियों को लेकर पिछले दो साल से अफसरों के आफिस के चक्कर लगा रहे हैं। यमुना कार्य योजना के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त आदेश हैं कि शहर में ऐसे उद्योग नहीं चलेंगे। हाईकोर्ट ने एक अन्य फैसले में भी आवासीय क्षेत्र में उद्योगों को प्रतिबंधित किया है। लेकिन, अवैध रूप से यहां यह भट्टियां चल रही हैं।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने शिकायत उपरांत इसे अवैध घोषित किया, लेकिन दो साल बाद भी बंदी की कार्रवाई किसी स्तर पर नहीं हो रही है। शिकायत करने पर पुलिस शिकायतकर्ताओं को ही धमका रही है। ऐसी स्थिति में यहां लोग घुट-घुट कर मर रहे हैं। दमा के रोगियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। डीएम को भेजे पत्र में उक्त शिकायतकर्ताओं ने अवैध भट्टियों को बंद कराते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।