रमणरेती मार्ग स्थित वृंदावन शोध संस्थान में बुधवार को चैतन्य महाप्रभु वृंदावन आगमन पंचशती समारोह के अंतर्गत कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। नवनिर्मित संग्रहालय और पंचशती समारोह के कलेंडर का भी लोकार्पण हुआ।
समारोह के मुख्य अतिथि डा. अशोक चक्रधर ने कहा कि आज समाज को चैतन्य भाव की आवश्यकता है। वे समन्वयवाद के श्रेष्ठ उदाहरण थे। उन्होंने सैकड़ों वर्ष पूर्व भारत की पवित्र भूमि पर इस बीज का वमन किया। विशिष्ट अतिथि अध्यात्मिक गुरु श्रीवत्स गोस्वामी ने कहा कि चैतन्य भाव को जागृत करने के लिए वृंदावन शोध संस्थान का यह आयोजन स्वयं में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि चैतन्य महाप्रभु की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। शिक्षाविद् मोहनस्वरूप भाटिया ने कहा कि ब्रज के सांस्कृतिक उत्थान में वृंदावन शोध संस्थान महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। संस्थान अध्यक्ष आरडी पालीवाल ने अतिथियों का स्वागत किया। स्वामी महेशानंद सरस्वती ने कलेंडर का विमोचन किया। समारोह के समन्वयक आदित्य चौधरी ने भी विचार रखे।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ डा. अशोक चक्रधर, स्वामी महेशानंद सरस्वती, अध्यात्मिक गुरु श्रीवत्स गोस्वामी, मोहनस्वरूप भाटिया, संस्थान के अध्यक्ष आरडी पालीवाल, डीएम राजेश कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर पवन चतुर्वेदी, अनंतवीर प्रभु, डा. महेश नारायण शर्मा, राधाकृष्ण पाठक, उदयन शर्मा, विष्णु प्रिया चौधरी, अनूप शर्मा, देवेंद्र शर्मा, विकास खन्ना, संजय पौरुष, आशीष, राजेश शर्मा आदि उपस्थित रहे।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
बुधवार को समारोह के अंतर्गत संकीर्तन और चैतन्य महाप्रभु के जीवन पर आधारित नाट्य लीला का भी भावपूर्ण मंचन किया गया। गौड़ीय मिशन सन्यासी एवं ब्रह्मचारियों ने संकीर्तन और मणिपुरी कलाकारों ने पुंग चोलम की रंगारंग प्रस्तुति दी। इसके बाद कलाकारों ने चैतन्य महाप्रभु नृत्य नाटिका और चैतन्य चरित नाट्य प्रस्तुत किया।