भारत सरकार ने टीबी की पुष्टि के लिए टीबी गोल्ड टेस्ट को अमान्य कर दिया है। इसके लिए सरकारी अस्पतालों में बलगम परीक्षण को ही मान्यता दी गई है। बावजूद इसके निजी डॉक्टर इस टेस्ट को लिख रहे हैं और पैथोलॉजी पर ये जांच बेखौफ हो रही है।
टीबी की संभावना वाले जो रोगी निजी क्षेत्र में उपचार के लिए जा रहे हैं, उन्हें टीबी गोल्ड टेस्ट लिखा जा रहा है। इस टेस्ट की फीस बाजार में ढाई से तीन हजार तक की है। जबकि भारत सरकार ने टीबी की संभावना के लिए इस जांच को ही अमान्य कर रखा है। इसके लिए जिला क्षय रोग केंद्र कई बार पत्र के माध्यम से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को भी आगाह कर चुका है। फिर भी टीबी की पुष्टि के लिए टीबी गोल्ड टेस्ट लिखे जाने से सवाल उठ रहे हैं।
सरकारी चिकित्सक लिख रहे बाजार की दवा
विश्व स्वास्थ्य संगठन की निगरानी में टीबी का संपूर्ण इलाज सरकारी अस्पताल में निशुल्क किया जाता है। लेकिन सरकारी डॉक्टर भी निजी चिकित्सकों के समान से बाजार में ही उपलब्ध दवा लिख रहे हैं। महर्षि दयानंद अस्पताल में मरीजों को टीबी के उपचार के लिए बाजार की दवा लिखी जा रही है।
भारत सरकार ने नोटिफिकेशन के माध्यम से टीबी के लिए किसी प्रकार के सिरोलॉजिकल (टीबी गोल्ड) टेस्ट को अमान्य कर दिया है। हमारे पास अगर कोई मरीज लिखित में शिकायत करता है तो हम मुख्य चिकित्सा अधिकारी के माध्यम से सख्त कार्रवाई कराएंगे। टीबी का इलाज पूर्णत: निशुल्क है। अगर कोई सरकारी चिकित्सक बाजार की दवा लिख रहा है तो ये गलत है।
-डा. प्रवीन भारती, जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी, मथुरा