इस बार मथुरा की पांच विधानसभाओं में जबरदस्त मतदान हुआ। हारजीत का परिणाम तो 11 मार्च को आएगा लेकिन इतना साफ है कि इस बार वे पांच साल पहले हुए चुनाव से इतर होंगे। प्रत्याशियों के हार जीते के दावे और गणित धरे रह गए। कहीं जातीय तो कहीं धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण हुआ। एक दूसरे के वोटों में खूब सेंधमारी हुई, साथ ही अनुमान और आंकलन धरे रह गए। हर सीट पर अलग गणित और अलग समीकरण नजर आया।
मथुरा विधानसभा
इस विधानसभा से भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पार्टी ने ब्राह्मण वोट और भाजपा के परंपरागत वोट को देखते हुए इस सीट से उन्हें मैदान में उतारा था। जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन से विधायक प्रदीप माथुर मैदान में हैं। रालोद से डा. अशोक अग्रवाल चुनाव को चुनौतीपूर्ण बनाए रहे। बसपा से योगेश द्विवेदी लड़ रहे हैं। प्रदीप माथुर और अशोक अग्रवाल मुस्लिम वोटरों के सहारे जीत के दावे पेश कर रहे हैं। इस सीट पर मुस्लिम भी निर्णायक स्थिति में है। लेकिन मुस्लिम बाहुल्य इलाकों के बूथ इस्लामिया इंटर कालेज, जैन आइडिल पब्लिक स्कूल, बीएसए कालेज, सदर बाजार, औरंगाबाद और जयसिंहपुरा से जो रुझान आया उसके मुताबिक मुस्लिम वोट बंटता नजर आया है। रालोद प्रत्याशी अशोक अग्रवाल के पक्ष में मुस्लिमों ने ज्यादा वोट किया है जिससे वो मजबूत हुए। कांग्रेस प्रत्याशी भी कई जगह मुकाबले में हैं।
मांट विधानसभा
मांट विधानसभा में जातीय आधार मतदाता बंटता नजर आया। जाट बहुल इस सीट पर ब्राह्मण भी बहुतायत में हैं। इन्हीं वोटों के जातीय समीकरण को देखते हुए पार्टियों ने प्रत्याशी उतारे भी। रालोद से योगेश नौहवार, कांग्रेस-सपा गठबंधन ने जगदीश नौहवार और बसपा ने इस सीट से सात दफा विधायक रह चुके श्यामसुंदर शर्मा पर दांव लगाया। वहीं भाजपा ने भी ब्राह्मण चेहरे के रूप में एसके शर्मा को अपना प्रत्याशी बनाया था। यहां जाट बहुल पानी गांव, डांगोली, ऊधर, दीवानाकलां, मखदूमपुर, सुरीर, जाबरा और लक्ष्मीनगर में हैंडपंप तेज चल रहा था। हाथी भी अपनी जगह बनाए रहा। इस सीट पर कहीं रालोद बसपा तो कहीं रालोद भाजपा के बीच मुकाबला होता नजर आया।
बलदेव विधानसभा
सुरक्षित सीटों में शामिल जाट बहुल बलदेव विधानसभा से भाजपा के पूरन प्रकाश मैदान में हैं। पूरन प्रकाश ने रालोद छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। जबकि रालोद ने निरंजन सिंह धनगर को सियासी समर में उतारा। जबकि बसपा से प्रेमचंद कर्दम और कांग्रेस-सपा गठबंधन से रनवीर सिंह धनगर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इस सीट पर करीब सत्तर हजार जाट हैं। इन जाटों पर भाजपा और रालोद दोनों ही अपना दावा पेश कर रहे हैं। गौसना, सुखदेवपुर, यमुनापार, लक्ष्मीनगर, सिहोरा, अचावली, सनोरा, धर्मपुरा, ओल, सरूरपुर, नगला छीतर सिंह, जुरवई और परखम के बूथों जाट मतों में बंटवारा होता नजर आया। हालांकि कुछ बूथों पर बसपा तो कहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन टक्कर देते नजर आए।
गोवर्धन विधानसभा
ठाकुर, जाट और ब्राह्मण बहुतायत वाली इस सीट पर दलित भी काफी संख्या में हैं। इस विधानसभा सीट पर बसपा के राजकुमार रावत विधायक हैं। वो इस बार भी बसपा के टिकट पर सियासी बाजी खेल रहे हैं। जबकि रालोद ने कुंवर नरेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है। वहीं भाजपा ने ठाकुर चेहरे के रूप में कारिंदा सिंह को टिकट दिया था। जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन से रणवीर सिंह पांडव मैदान में हैं। हालांकि हार-जीत के आंकड़े तो बेहद उलझे हुए हैं लेकिन गोवर्धन, राधाकुंड, दौसेरस, मलसराय, सौंख, नगला अड्डा, बछगांव और स्योबा मिले रुझानों से यहां त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति नजर आई। कुछ कस्बों में हाथी की चाल तेज थी तो कहीं कमल खिल रहा था। जाट बहुल क्षेत्रों में वोट बंटता नजर आया।
छाता विधानसभा
ये विधानसभा सीट भी जाट और ठाकुर बहुल है। जबकि ब्राह्मण भी निर्णायक की भूमिका में हैं। इस सीट से पूर्व मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी भाजपा से और विधायक ठाकुर तेजपाल सिंह के बेटे अतुल सिसौदिया सपा के समर्थन से मैदान में हैं। बसपा से मनोज पाठक और रालोद से ऋषिराज सिंह किस्मत आजमा रहे हैं। लक्ष्मीनारायण चौधरी इस सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं लिहाजा सपा समर्थित प्रत्याशी के पिता ठाकुर तेजपाल सिंह भी इस सीट से विधायक हैं। बरसाना, नंदगांव, हाथिया, कमई, कोसीकलां, कोटवन, हताना, खरोट और अजीजपुर के बूथों से जो रुझान आया उसके मुताबिक मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा समर्थित प्रत्याशी के बीच है। कई बूथों पर बसपा भी कड़ी टक्कर दे रही हैं।