मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को बरेली में कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान कहा कि मथुरा कांड में पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। उनके इस बयान ने मथुरा से लेकर लखनऊ तक के पुलिस अफसरों को परेशान कर दिया है । वजह यह है कि पुलिस की अभी तक की जांच में घटना में किसी पुलिसकर्मी का हाथ होने की जानकारी नहीं आई है। पुलिस अधिकारी यह मालूम करने में लगे हैं कि सीएम की तक यह जानकारी किस माध्यम से पहुंची है? अधिकारियों ने एलआईयू से भी काफी देर बात की है। इतना ही नहीं। भाजपा के नेताओं से भी पूछा है कि कहीं उनमें से किसी ने तो सीएम के कान में फूंक नहीं मार दी है।
सोमवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके अग्रवाल आगरा में थे। उन्होंने आगरा और अलीगढ़ मंडल के आठ जिलों की चुनाव तैयारियों की समीक्षा की। मीटिंग में अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था ) आदित्य मिश्र, एडीजी आगरा जोन अजय आनंद, आईजी आगरा रेंज मुथा अशोक जैन और मथुरा समेत आठों जिलों से कप्तान मौजूद रहे।
पुलिस सूत्रों की मानें तो मीटिंग के बाद पुलिस अफसरों के बीच इस पर चर्चा हुई कि सीएम ने मथुरा कांड में पुलिसकर्मियों के शामिल होने की बात किस आधार पर कही है? उधर, पुलिस अफसरों ने मथुरा के एसएसपी, एसपी सिटी, सीओ एलआईयू से भी इस बारे में जानकारी की। अभी तक की जांच में किसी भी पुलिसकर्मी को आरोपी नहीं बनाया गया है। न ही यह बात आई है कि अपराधियों का साथ किसी पुलिसकर्मी ने दिया।
बता दें, मथुरा में दो सराफों की हत्या कर चार करोड़ का सोना लूटा गया था। पुलिस ने खुलासा किया था कि वारदात मथुरा के ही रंगा गैंग ने अंजाम दी। मुठभेड़ के बाद गैंग के सरगना समेत छह बदमाश गिरफ्तार किए गए।
आगरा। इस बारे में पूछे जाने पर डीजीपी सुलखान सिंह ने फोन पर बताया कि मथुरा की घटना में कोई पुलिसकर्मी शामिल नहीं पाया गया है। पुलिस ने केस का एकदम सही खुलासा किया है। आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। डीजीपी का कहना है कि मुख्यमंत्री ने बरेली में ऐसा बयान नहीं दिया है।