वृंदावन। मंदिरों की नगरी वृंदावन में इन दिनों क्रान्क्रिटाइजेशन एवं व्यावसायिक गतिविधियों का तेजी से इजाफा हो रहा हैं। हर दिन व्यावसायिक कॉम्पलैक्स एवं शोरूम इस भूमि की पहचान बन गए हैं। इस कतार में वृंदावन के आश्रम एवं मठ भी पीछे नहीं हैं, किसी ने दुकान तो किसी ने आश्रम को होटल में परिवर्तित कर लिया है।
बीते दो दशक में बदलता इस धार्मिक नगरी का स्वरूप यहां के लिए चिंताजनक हैं। हरितमा और प्राचीनता अब पंचकोसीय परिक्रमा मार्ग से भी खत्म होती नजर आ रही है। परिक्रमा मार्ग के दोनों ओर व्यावसायिक गतिविधियां सक्रिय हैं और व्यावसायिक कॉम्पलैक्स, होटल एवं शोरूम का निर्माण किया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलादकृष्ण शुक्ला ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर यहां के प्राचीन स्वरूप को बचाने की मांग की है।
उन्होंने पत्र में कहा है कि छटीकरा, रमणरेती मार्ग, हरिनिकुंज चौराहा, विद्यापीठ चौराहा, प्रताप बाजार, गांधीमार्ग, अठखम्भा, बनखंडी सहित परिक्रमा मार्ग में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, जिनको जिला प्रशासन एवं मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की मौन स्वीकृति है। उन्होंने केंद्र सरकार से वृंदावन के स्वरूप को बचाने की गुहार लगाई है।