फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नप सकते हैं कई अफसर, शासन को भेजी गई जांच रिपोर्ट

विज्ञापन
यमुना पुल पर गड्ढों से निकली हुई सरिया। - फोटो : MATHURA
विज्ञापन
मथुरा। 80 करोड़ की लागत से दो साल पहले बने यमुना पुल की सड़क की परत टूट रही है। मामले में शासन को भेजी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर कई अफसरों पर गाज गिरना भी तय माना जा रहा है। गिट्टी, सरिया और सीमेंट से बनी इस परत के निर्माण में अनियमितता से इनकार नहीं किया जा सकता। बड़े घोटाले के आरोप भी लगने लगे हैं।
विज्ञापन

हालांकि जो रिपोर्ट शासन को भेजी गई है, उसमें एक्यूपेशन ज्वाइंट में मानकों को ध्यान न रखने की बात कही गई है। साथ ही निर्माण सामग्री को मानकों के अनुसार बताया जा रहा है, लेकिन यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है।
शिकायतकर्ता जनकल्याणकारी योजना प्रचार प्रसार अभियान के जिलाध्यक्ष देवेंद्र चतुर्वेदी ने अब निर्माण की जांच किसी अन्य एजेंसी से कराने की मांग की है। अमर उजाला में यह मामला प्रकाशित होने के बाद से अधिकारियों में हड़कंप है।
विज्ञापन

विभाग में फाइलें खंगाली जा रहीं हैं। यमुना पर 2014 में साढ़े दस मीटर चौड़े और 600 मीटर लंबे पुल का निर्माण शुरू हुआ था। 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुल का उद्घाटन किया। पुल बनने के छह महीने बाद ही जर्जर होने लगा।
पुल बार-बार ठीक करने के बाद भी लगातार उखड़ रहा है। मामले की शिकायत शासन से हुई और सेतु निगम ने जांच रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी। दो साल में ही पुल कैसे जर्जर हो गया यह बड़ा सवाल है।
सेतु निगम के नोडल अधिकारी आरके अग्रवाल ने बताया कि पुल के एक्यूपेशन ज्वाइंट में तकनीकी गड़बड़ी मिली है। साढ़े सात मीटर चौड़ाई वाले पुल पर 40 मीटर के अंतर से कॉलम बनाए जाते हैं। साढ़े दस मीटर चौड़ाई वाले पुल में 25 मीटर के कॉलम होने चाहिए।
पुल में 40 मीटर की दूरी पर कॉलम बनाए गए हैं, जो तकनीकी रूप से गलत हैं। इसलिए पुल की सड़क वाहनों के दबाव से उखड़ रही है। नोडल अधिकारी ने बताया कि पुल की ऊपरी परत को हटाए बिना इस समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। इसके लिए शीघ्र ही टेेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी और ऊपरी परत का निर्माण किया जाएगा।
पुल पर डामर की परत होगी कामयाब
पुल पर अब डामर की परत ही कामयाब होगी। बताया जा रहा है कि शासन स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। जल्द ही इस पुल के निर्माण से जुड़े इंजीनियरों और अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
निर्माण में की गई जल्दबाजी
मथुरा। यमुना पुल का जब निर्माण किया जा रहा था तब निर्माण में देरी को लेकर काफी शोर मचा। शासन स्तर पर निर्माण कार्य तेज करने का दवाब भी था। 2015 में पुज्ञ्ल के निर्माण के व्दौरान एक चैंबर यमुना में गिर गया था।
तभी से पुल निर्माण में गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे थे, लेकिन इसकी अनदेखी कर दी गई। 2018 में पुल का उद्घाटन मुख्यमंत्री ने कर दिया। छह महीने बाद से पुल जर्जर होना शुरू हो गया।
‘पुल निर्माण में हुआ है बड़ा घोटाला’
मथुरा। पुल निर्माण में घोटाले का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री से शिकायत करने वाले जनकल्याणकारी योजना प्रचार प्रसार अभियान के जिलाध्यक्ष देवेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि पुल की निर्माण सामग्री की जांच किसी दूसरी एजेंसी से कराई जानी चाहिए।
विज्ञापन

पुल की ऊपरी परत को उखाड़ने और दोबारा निर्माण कराने में जो खर्च आएगा उसके लिए जिम्मेदार कौन होगा। पुल निर्माण में बड़ा घोटाला किया गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें