सरकारी अस्पताल में प्रसव के नाम पर स्टाफ रुपये वसूलता है। जब कोई मजबूर रुपये नहीं दे पाता तो उसे उपचार देने से इंकार कर दिया जाता है। सोमवार को महिला अस्पताल का कड़वा सच सुन जिलाधिकारी राजेश कुमार भी अवाक रह गए।
सुबह 11 बजे डीएम महिला अस्पताल में निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। यहां उन्होंने वार्डों का निरीक्षण किया और तीमारदारों से सीधा संवाद कर स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर की जानकारी ली। वार्ड में भर्ती दुर्गेश के सार्थ आइं महिला ने बताया कि दुर्गेश बुधवार की रात प्रसव पीड़ा से कराही तो वो अस्पताल आईं।
यहां ड्यूटी पर तैनात नर्स ने 1000 रुपये की डिमांड की। महिला ने असमर्थता जताई तो उपचार न करने की चेतावनी दी। मजबूरी में रुपये देने पड़े। पीड़िता के इन शब्दों से डीएम भी अवाक रह गए। ड्यूटी पर तैनात स्टाफ का नाम पूछा तो अस्पताल प्रशासन बगलें झांकने लगा।
अस्पताल में प्रसव पीड़िताओं को नाश्ते में दूध नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा वार्डों में आर्र्दता से मरीजों का हाल बेहाल देख डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई। डीएम ने कहा कि प्रसव के लिए एक हजार रुपये लेने वाली नर्स के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई होगी। उन्होंने मौके से उपस्थिति रजिस्टर सहित अन्य अभिलेख भी जब्त कर लिए। इनकी जांच की बात कही। इस अवसर पर कार्यवाहक सीएमएस डा. बीडी भास्कर, नगर मजिस्ट्रेट विजय कुमार आदि थे।