रूस और यूक्रेन के बीच जंग का दर्द उनसे पूछो, जिनके बच्चे यूक्रेन में फंसे हैं। मां-बाप सो नहीं पा रहे हैं। तमाम मुसीबतों को पार करते हुए वहां फंसे मेडिकल छात्र-छात्राएं हिम्मत नहीं हार रहे हैं और परिजनों से कह रहे हैं कि सब कुछ ठीक हो जाएगा, जल्दी वापस आऊंगा। ऐसा ही आशा गुंजिता के पिता विजय सिंह लोधी राजपूत को जगी है। उनकी बेटी ट्रेन के माध्यम से यूक्रेन से हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंच गई है। इसके लिए 1300 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ा। सफर के दौरान छात्रा की सांसें अटकी रहीं कि सफर के दौरान कब धमाका हो जाए।
एमबीबीएस तृतीय वर्ष की है छात्रा
विजय सिंह लोधी राजपूत निवासी 180 श्रीजी शिवाशा एस्टेट, गोवर्धन रोड मथुरा ने बताया उनकी बेटी गुंजिता सिंह एमबीबीएस तृतीय वर्ष बोगोमुलेट यूनिवर्सिटी कीव यूक्रेन से पढ़ाई कर रही थी। मंगलवार को बेटी ने ट्रेन में बैठकर राजधानी कीव को छोड़ दिया था और बुधवार को पड़ोसी देश हंगरी पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि जब बेटी यूक्रेन से हंगरी के लिए ट्रेन से जा रही थी तो रास्ते में कई बार चेकिंग की गई।
भारत का नाम सुनते ही मिल रही मदद
उन्होने बताया कि जैसे ही बेटी को कोई पूछता कि कहां से हो, तो भारत का नाम सुनते ही मदद के लिए तैयार हो जाता था। बेटी किसी तरह से यूक्रेन सीमा पार करके हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंच गई है। वहां पर भारत सरकार की मदद से बेटी को हॉस्टल में ठहराया गया है। खाने-पीने समेत सभी सुविधाएं मिल रही हैं।
फ्लाइट का इंतजार
बेटी ने भारत आने के लिए रजिस्ट्रेशन करा दिया है, जैसे ही फ्लाइट का नंबर आएगा, बेटी वापस भारत लौट आएगी। पूरी व्यवस्था भारत सरकार ही करा रही है। उन्होंने बताया कि हॉस्टल में भारत के करीब 1000 छात्र-छात्राएं रुके हैं। उन्होंने रुंधे स्वर में पीएम को शुक्रिया अदा किया है।
छटीकरा का छात्र रोमानिया पहुंचा
छटीकरा निवासी छात्र योगेश पचौरी एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई यूक्रेन में कर रहा है। पांच दिसंबर 2021 को यूक्रेन गया था। वो भी वहां फंसा था। भारतीय दूतावास की मदद से अब रोमानिया हवाई अड्डे पर पहुंचने में कामयाब हुआ है।