वृंदावन। धर्मनगरी वृंदावन कोरोना की मार से सहमी हुई है। शनिवार और रविवार के वीकेंड में लॉकडाउन की घोषणा अब यहां के लिए रोजगार पर ब्रेक लगाने का काम करेगी। इससे धार्मिक पर्यटकों पर निर्भर वृंदावनवसियों की चिंता बढ़ गई हैं।
श्रीराधाकृष्ण की लीला स्थली वृंदावन में अधिकांश व्यक्तियों की रोजीरोटी धार्मिक पर्यटन पर निर्भर है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और बंगाल सहित विभिन्न राज्यों से आने वाले दर्शनार्थी ही यहां की रोजीरोटी का माध्यम बनते हैं, लेकिन पिछले एक सप्ताह से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बहुत गिरावट दर्ज हुई है।
इसमें भी दिल्ली में लॉकडाउन के बाद यूपी सरकार ने भी शनिवार और रविवार का वीकेंड लॉकडाउन घोषित कर दिया है। इन दो दिनों में ही यहां सबसे अधिक श्रद्धालु आते थे, लेकिन इस दौरान लॉकडाउन होने से यहां श्रद्धालुओं की संभावना पूरी तरह से खत्म हो गई है जो पर्यटकों से जुड़े रोजगार पर ब्रेक लगाने का काम करेगा।
इसकी चिंता स्थानीय लोगों में साफ नजर आ रही है। पंडा सभा से शशिकांत बोहरे का कहना है कि श्रद्धालुओं की संख्या कोरोना का प्रभाव बढ़ने के बाद बहुत कम हो गई है। अब तो वीकेंड घोषित होने से आसपास से लोग भी नहीं आ सकेंगे। हालांकि उन्होंने सभी से इस दौर में अपना बचाव करने की अपील की है।
पूरे जिले का कारोबार प्रभावित होगा
वृंदावन ही नहीं बल्कि मथुरा, द्वारिकाधीश, गोवर्धन, गोकुल, बरसाना, नंदगांव व बलदेव आदि स्थानों पर भी वीकेंड पर ही श्रद्धालुओं का आना जाना होता है। लेकिन कोरोना से अब श्रद्धालुओं का आना बंद हो जाएगा। इसका प्रभाव यह होगा कि मंदिर प्रबंधन, खाने पीने के सामान, टूर एंड ट्रैवल्स, होटल-धर्मशाला-गेस्ट हाउस कारोबार ठप रहेगा। एक बार फिर गरीब तबके के लोगों को रोजी-रोटी के लाले पड़ जाएंगे और रोजगार का भी संकट होगा।