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Mathura News: तिरंगे में लिपटकर घर लौटे जांबाज राकेश रावत

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नौहझील। पश्चिम बंगाल के मालदा में भारत-बांग्लादेश सीमा पर संदिग्ध परिस्थितियों में वीरगति को प्राप्त हुए बीएसएफ इंस्पेक्टर राकेश कुमार रावत का पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार देर रात जब उनके पैतृक गांव पचहरा पहुंचा। रात लगभग सवा नौ बजे जैसे ही जांबाज का शव यमुना एक्सप्रेस-वे के बाजना कट पर पहुंचा, वहां पहले से ही मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों ने तिरंगा यात्रा के साथ उनकी अगवानी की। डीजे पर बजते देशभक्ति के तरानों और बाइकों व गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ ग्रामीण तिरंगा लहराते हुए बाजना कट से गांव तक पहुंचे।
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58 वर्षीय राकेश रावत का सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) से महज 17 माह पहले निधन हो गया। निधन से कुछ समय पहले ही उन्होंने अपनी पत्नी सुनीता से बात की थी। रात करीब साढ़े दस बजे गांव में गमगीन माहौल के बीच अंतिम संस्कार हुआ। उनके बेटे संदीप जो कि चंडीगढ़ में इंजीनियर हैं, ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। चिता इंस्पेक्टर राकेश कुमार रावत 4 मई 1986 को सीमा सुरक्षा बल में भर्ती हुए थे। उनकी मौत की गुत्थी अब भी उलझी हुई है, क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर छह गोलियों के निशान मिले हैं, जबकि उनका सरकारी हथियार और कारतूस सुरक्षित पाए गए हैं।
इधर गमगीन परिजन क्षेत्रीय विधायक राजेश चौधरी से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़े। विधायक ने परिजन कोगले लगाकर ढांढस बंधाया व हर संभव सरकारी मदद दिलाने का भरोसा दिया। पूर्व विधायक श्याम सुंदर शर्मा, तहसीलदार बृजेश कुमार, नायब तहसीलदार राकेश उपाध्याय और थाना प्रभारी सोनू सिंह आदि ने पुष्पचक्र अर्पित कर इंस्पेक्टर को अंतिम विदाई दी। संवाद
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