जिले में कानून व्यवस्था, किसानों को मुआवजा, बिजली और पानी सहित विभिन्न समस्याओं के लिए जिला मुख्यालय पर भाजपा के प्रदर्शन की आवाज मुख्य सचिव तक नहीं पहुंच सकी। भारी-भरकम भीड़ के बावजूद पार्टी कार्यकर्ताओं की आवाज सुनने के लिए सिर्फ सिटी मजिस्ट्रेट ही पहुंचे। इससे नाराज पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपने नेताओं के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मंगलवार को भाजपा का जिला मुख्यालय पर राज्य सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन होना था। इसका नेतृत्व करने के लिए राज्य संगठन ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापतिराम त्रिपाठी को मथुरा भेजा। धरना के दौरान जिला मुख्यालय पर मुख्य सचिव की मौजूदगी होने के कारण भाजपाइयों में प्रदर्शन को लेकर जोश कुछ बढ़ गया था। इसका असर भीड़ के रूप में धरना स्थल पर नजर आया। पार्टी नेताओं जन समस्याओं को लेकर राज्य सरकार को जमकर कोसा। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य की सरकार को आततायी बताया तो विधायक जगन प्रसाद गर्ग ने एक जाति और परिवार की सरकार कहा।
कार्यक्रम स्थल पर भाजपाई उपद्रव न करें, इसके लिए प्रशासन ने पर्याप्त पुलिस तैनात कर दी थी। धरना में देरी से पहुंचे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापतिराम त्रिपाठी से ज्ञापन लेने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट विजय कुमार ने प्रयास शुरू कर दिए। पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं की मंशा थी कि ज्ञापन डीएम लेने आए या फिर कार्यकर्ता कार्यालय पहुंचे। डीएम के आफिस जाने के लिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष तैयार नहीं हुए।
ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को ही दे दिया गया। इससे पार्टी के युवा कार्यकर्ता बिगड़ गए और अपने नेताओं के खिलाफ ही नारेबाजी शुरू कर दी। कलेक्ट्रेट गेट पर प्रदर्शन किया और जाम भी लगा दिया। इस पूरे बवाल से पहले ही मुख्य सचिव वृंदावन के लिए निकल गए थे। इस दौरान पूर्व मंत्री रविकांत गर्ग, पूर्व विधायक अजय कुमार पोइया, पूर्व जिलाध्यक्ष ठाकुर ओमप्रकाश सिंह, पूर्व चेयरमैन वीरेन्द्र अग्रवाल, रविंद्र पांडेय, मुकेश गौतम, भगवत रुहेला, चेतन मलिक, राजेश चौधरी सहित बड़ी संख्या में पार्टी नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।