आए भरत संग सब लोगा।
कृस तन श्रीरघुबीर बियोगा॥
बामदेम बशिष्ठ मुनिनायक।
देखे प्रभु महि धरि धनु सायक॥
नगर में बुधवार रात को ऐतिहासिक भरत-मिलाप लीला देख लोगों आंखों में आंसू भर लाए। भरत मिलाप मेले में भरत-शत्रुघ्न श्रद्धालुओं के कंधों पर होते हुए अयोध्या के द्वार पर श्रीराम से मिले तो पूरा मेला क्षेत्र राजा रामचंद्र की जयकार से गुंजायमान हो उठा। भ्रातृ प्रेम की अद्भुत झांकी ने कोसीवासियों को आनंदित कर दिया।
लंका में रावण के वध के बाद सीता माता को लेकर भगवान राम अयोध्या लौटे। यहां राम और लक्ष्मण का भरत और शत्रुघभन से मिलन और माता जानकी के चरणों में भरत का शीश झुकाना श्रद्धालुओं भावुक कर गया। मिलन के साथ ही रामजी की आरती उतारकर स्वागत किया गया। जिसने राम के आने की खबर सुनी, वही अयोध्या के प्रवेश द्वार की ओर दौड़ पड़ा।
इससे पहले लीला मंचन में भरत को श्रीराम के आने की खबर देकर हनुमानजी वापस भगवान राम के पास चले आते हैं। चित्रकूट के प्रतीक ग्यालाल स्मृति भवन से पुष्पक विमान के प्रतीक रथ पर साढ़े सात बजे श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण की सवारी हनुमान सहित निकाली गई। श्रीराम की सवारी को भरतमिलाप चौक पहुंचने में करीब दो घंटे का समय लगा। जगह-जगह पुष्प वर्षा हुई और आरती उतारी गई।
रात में श्रीराम की सवारी जब भरतमिलाप चौक में पहुंची तो श्रद्धालुओं की अपार भीड़ से वातावरण राममय हो चुका था। श्रीराम के पास भरत-शत्रुघ्न के जाने के लिए श्रद्धालुओं ने अपने कंधों से मानव सड़क का निर्माण कर दिया। हर श्रद्धालु की सोच यही थी कि भरत उनके कंधों से गुजरकर उनके शरीर को छू लें। इस प्रकार भरत और शत्रुघ्न अयोध्या के द्वार तक पहुंचे। चारों भाईयों के गले मिलते ही ब्रज मंडल का अलौकिक भरत-मिलाप रात में संपन्न हो गया।