वृंदावन। केशीघाट के समीप स्थित प्राचीन जुगल किशोर मंदिर में चमगादड़ों ने डेरा जमा लिया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित मंदिर की पहली मंजिल पर जाने के लिए बनीं सीढ़ियों पर चमगादड़ों के कारण गंदगी के ढेर लगे हैं। यही नहीं मंदिर के शिखर के आंतरिक भाग में भी बड़ी संख्या में चमगादड़ों ने डेरा जमाया हुआ है।
मुगल आक्रमण के दौरान प्राचीन जुगल किशोर मंदिर से आराध्य की मूर्तियों को अन्य स्थान पर सुरक्षित भेज दिया गया था। इसके बाद से मंदिर में मूर्ति की पुनर्स्थापना नहीं हो सकी और तभी से मंदिर के द्वार बंद हैं। लाल पत्थर से बने मंदिर को एएसआई द्वारा संरक्षित किया गया है। यदाकदा खुलने वाले मंदिर और उसके शिखर के आंतरिक भाग में बड़ी संख्या में चमगादड़ हैं। मंदिर के अंदर प्रकाश व्यवस्था न होने के कारण सीढ़ियों पर भी चमगादड़ों में अपना बसेरा बना लिया है।
ब्रज वृंदावन देवालय समिति के सचिव जगन्नाथ पोद्दार ने एएसआई से मांग की है कि मंदिर की सफाई व्यवस्था की जाए। साथ ही अन्य स्मारकों की तरह इसे भी श्रद्धालुओं के लिए खोला जाए ताकि प्राचीन धरोहरों का देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु दीदार कर सकें। एएसआई के वरिष्ठ संरक्षक सहायक नितिन प्रिय राहुल ने बताया कि प्राचीन जुगल किशोर मंदिर की देखरेख के लिए एक कर्मचारी तैनात है। जो सुबह मंदिर को सफाई के लिए खोलता है। सफाई कार्य के बाद मंदिर को बंद कर दिया जाता है।