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राधा के लिए श्यामाश्याम ने बरसाना में खेली थी लठामार होली

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मथुरा। बरसाना में लठामार होली खेलते हुरियारे व हुरियारिनें (फाइल फोटो)। - फोटो : MATHURA
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बरसाना (मथुरा)। नंद लाल सामरे ने राधा के लिए बरसाना में लठामार होली खेली थी। बात फागुन मास की है। जब राधा जी सखियों के साथ पनघट पर बैठी थीं। श्रीकृष्ण की लीलाओं के वर्णन में चिंतन व मनन में मगन हुए ध्यान में थीं, तभी एक सखी ने पानी के कुछ छींटे उन्हें मार दिए। साथी सखियां आपस में एक-दूसरे को पानी के छींटे मारने लगीं। सखियों संग राधा के मन में सिहरन उठी एवं उमंग सी जगी, तभी ललिता बोल उठीं कि यह कार्य श्रीकृष्ण संग क्यों न करें और हो हो कर होली खेलैं, तभी से श्रीकृष्ण ने राधा व सखियों से होली खेली।
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यह फागुन माह की सप्तमी थी। राधा संग सखियों ने अष्टमी के दिन दो सखियों को नंदगांव अपने कान्हा के लिए हो हो (होली) खेलने के लिए निमंत्रण भेजा। उधर, कान्हा ने आमंत्रण स्वीकार करते हुए बोले कल नवमी को हो हो खेलने सखाओं के साथ आऊंगा। सखी बरसाना पहुंच कर राधा जी को कान्हा के हो हो खेलने आने का समाचार सुनाती हैं और खुशी में लड्डू बांटती हैं। इसी दिन लड्डू होली की मान्यता जीवंत है। नवमी के दिन नंदलाल सखाओं के साथ हो हो खेलने बरसाना आते हैं और हो हो कर के राधा व सखियों संग हो हो खेलते हैं। हो हो खेलते-खेलते कान्हा ने कहा हो हो ले खेलो तभी से हो हो हुआ होली फिर रंग गुलाल व फूलों की छड़ी से द्वापर काल में राधाकृष्ण ने होली खेली। उसी परंपरा को आज भी जीवंत किए हुए हैं। बरसाना में 3 मार्च को लड्डू होली व 4 मार्च को लठामार होली खेली जाएगी।
राधाकृष्ण ने नंदगांव-बरसाना में लीलाएं की हैं। इसमें से एक लठामार होली भी जिसको अभी दोनों गांव के लोग जीवंत किए हैं। आज भी होली खेलने के दौरान राधाकृष्ण के होने का अहसास होता है।
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माधव गोस्वामी
लठामार होली की द्वापर काल में श्यामाश्याम राधारानी ने खेली थी। उसी परंपरा को आज हम जीवंत किए हैं।
महेश चंद
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