बांकेबिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी के चार सदस्यीय चुनाव प्रक्रिया को पूर्ण हुए मंगलवार को एक माह का समय पूर्ण हो रहा है, लेकिन कमेटी के गठन की प्रक्रिया अमल में न लाए जाने के कारण प्रबंध कमेटी के गठन पर संशय की स्थिति हो गई है।
विदित हो कि 24 अप्रैल को ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी के सदस्यों की चुनाव प्रक्रिया पूर्ण हुई। इसमें शयन भोग के दो सदस्यों गौरव गोस्वामी और दिनेश गोस्वामी का निर्वाचन हुआ, जबकि राजभोग के रज गोस्वामी और ब्रजेश गोस्वामी निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए।
24 मई को निर्वाचन प्रक्रिया को एक महीना हो रहा है, लेकिन चुने गए शयनभोग और राजभोग के चार सदस्याें में आपसी सामंजस्य न बैठ पाने के कारण कमेटी के अन्य तीन बाहरी सदस्यों की चयन प्रक्रिया पर एक राय न बनने के चलते कमेटी का गठन अधर में है।
मंदिर प्रबंध कमेटी का मामला मंगलवार के बाद अब मथुरा मुंसिफ के समक्ष पहुंचने की प्रबल संभावना दिख रही है। मंदिर के सेवायत प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी के अनुसार बांकेबिहारी मंदिर की समिति की स्कीम के अनुसार चुनाव प्रक्रिया से चुने गए शयनभोग और राजभोग के दो-दो सदस्यों को एक माह में तीन बाहरी सदस्यों का चयन कर कमेटी गठन के लिए एक पैनल बनाकर मथुरा मुंसिफ के समक्ष रखना होता है।
मथुरा मुंसिफ पैनल में आए कई लोगों में से तीन सदस्यों के नाम पर अंतिम मोहर लगाकर सात सदस्यीय मंदिर प्रबंध कमेटी के गठन के लिए एक माह का समय देते हैं। इस एक माह में सात सदस्यों में से एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष सहित पांच सदस्यों वाली कमेटी गठन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद इसे मथुरा मुंसिफ के पास दोबारा से स्वीकृति देने के लिए भेजा जाता है। इसके बाद मंदिर प्रबंध कमेटी अस्तित्व में आ जाती है।
इस बार कमेटी के गठन की प्रक्रिया पूर्ण होने पर संशय की स्थिति चुनाव होने के बाद से ही लगातार बनी हुई है। बताया जाता है कि राजभोग के दो और शयनभोग के एक सदस्य ने चार नामों की सूची बाहरी सदस्यों के लिए तैयार की, लेकिन एक सदस्य ने असहमति जता दी।