बैंक से 14000 हजार रुपये निकालने पहुंची महिला को पहले तो बैंक वालों ने इंकार ही कर दिया था, लेकिन जब एसडीएम से शिकायत की तो उसे दस हजार रुपये के सिक्कों से भरा बैग थमा दिया गया। बैग में दो-दो रुपये के सिक्के थे। महिला ने नोट देने के लिए काफी गुहार लगाई, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
सुरीर गांव निवासी रामवीर खेतीबाड़ी करके परिवार की गुजर बसर करते हैं। दो दिसंबर को उनकी बेटी की शादी है, लिहाजा वह तैयारियां कर रहे हैं। बुधवार को रामवीर अपनी पत्नी शीला को साथ लेकर सुरीर की सिंडिकेट बैंक पहुंचे और 14000 रुपये निकालने के लिए फार्म भरा। जब फार्म जमा किया तो कह दिया कि बैंक में पैसा ही नहीं है।
शीला ने काफी गुहार लगाई, लेकिन यहां किसी का दिल नहीं पसीजा। शीला ने एसडीएम मांट सदानंद गुप्ता से बेटी की शादी की बात बताते हुए पैसे दिलवाने को कहा। एसडीएम के कहने पर बैंक वालों ने पैसे तो दे दिए, लेकिन सिक्कों में। दस हजार रुपये 2-2 रुपये के सिक्कों में दे दिए। एक बैग बैंक वालों ने रामवीर के हाथ में थमा दिया तो दूसरा शीला के हाथ में। रामवीर ने कहा भी कि वह इन सिक्कों का क्या करेंगे। हमें शादी के लिए खरीदारी करनी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लिहाजा पति-पत्नी सिक्कों का बैग लेकर अपने घर चले गए।
कैश नहीं मिला तो फूट-फूटकर रो पड़ी महिला
नारायणपुरी धौलीप्याऊ की रहने वाली कमलेश मेहनत मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करती हैं। उनकी ससुराल सादाबाद में है। तीन दिन पहले उनके जेठ की मौत हो चुकी है, लेकिन इतने पैसे भी उसके पास नहीं हैं कि अपनी ससुराल जा सकें। बुधवार को धौलीप्याऊ स्थित बड़ौदा बैंक से रकम निकालने के लिए आई थीं, लेकिन यहां पैसे नहीं मिल पाए। बैंक वालों ने कह दिया कि हमारे पास कैश नहीं है। कमलेश का कहना है कि वह दो दिन से बैंक व एटीएम के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन उनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। वह अपनी ससुराल भी नहीं जा पा रही हैं।
दर्शनार्थियों के पास खाने के भी पैसे नहीं बचे
मुंबई से मथुरा घूमने के लिए 40 लोगों का एक दल आया हुआ है। इनके पास जो एक हजार और पांच सौ के नोट थे वह सब बेकार हो चुके हैं। बैंक और एटीएम से पैसे निकल नहीं पा रहे हैं। आशीष कुमार ने बताया कि अब तो इतने पैसे भी नहीं बचे हैं जो खाना खा सकें। होटल का पैसा भी उधार हो गया है। रोज बैंक में लगते हैं, लेकिन जब तक उनका नंबर आता है बैंक में पैसा ही खत्म हो जाता है।