करोड़ों की योजनाएं बनी, लाखों हर वर्ष खर्च होने के बाद यमुना शुद्ध नहीं हो सकी। नगर पालिका प्रशासन एसटीपी और पंपिंग स्टेशन के संचालन के लिए प्रतिमाह 1 लाख 82 हजार नौ सौ रुपये का ठेका आगरा की निजी फर्म को दे रखा है। इसके बाद भी नगर के अधिकांश नाले यमुना में गिर रहे हैं।
एक ओर यमुना में नालों और सीवर का गंदा पानी जाने से रोकने के लिए संत लाल बाबा की भूख हड़ताल जारी है। वहीं दूसरी ओर पालिका और जिला प्रशासन की लापरवाही से यमुना में कई नाले गिर रहे हैं। वृंदावन के गांव बाबूगढ़ का बड़ा नाला, वाराह घाट, कालीदह घाट, जुगल घाट, बिहार घाट, श्रृंगार वट, केशीघाट, भौंराघाट, ज्ञान गुदड़ी घाट, चीरघाट, टिकारी घाट, श्मशान घाट, वंशीवट के नाले नदी में जा रहे हैं।
नहीं कारगर हो रहा एसटीपी प्लांट
केंद्र सरकार द्वारा यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए यमुना एक्शन प्लान के प्रथम चरण में एसटीपी और पंपिंग स्टेशन का निर्माण कराया। यमुना एक्शन प्लान के अंतर्गत 90 के दशक में कालीदह और ज्ञान गुदड़ी घाट पर एसटीपी का निर्माण कराया गया जिनमें कालीदह घाट स्थित एसटीपी का पिछले कई माह से नव निर्माण कार्य चलने के कारण इस पर असर पड़ा है।
इसके अलावा बिहारघाट, बड़ा बगीचा और कालीदह पर छोटे पंपिंग स्टेशनों का निर्माण हुआ। इनका उद्देश्य यमुना में गिरने वाले नाले के पानी को पंप के जरिए मुखर्जी पार्क स्थित बड़े पंपिंग स्टेशन पर प्रवाहित करना था। नगर पालिका के हाथों एसटीपी का रख-रखाव आने से व्यवस्थाएं ठप हो गई।