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आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हो गया मथुरा का लाल

Sat, 30 Jul 2016 11:43 PM IST
अमर उजाला मथुरा
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बबलू सिंह - फोटो : अमर उजाला
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जम्मू से आई एक फोन कॉल ने झंडीपुर से मथुरा तक हर आंख नम कर दी। फोन पर संदेश था कि मथुरा का लाल बबलू सिंह आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया है। रविवार को दोपहर तक पार्थिव शरीर हेलीकाप्टर से गांव में पहुंचेगा। यहां पूरे सैनिक सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया जाएगा। हालांकि, वर्तमान में उनका परिवार मथुरा के बालाजीपुरम में रह रहा है।    
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थाना फरह के गांव झंडीपुर निवासी बबलू सिंह (38) पुत्र मलूक सिंह सेना की जाट रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। इन दिनाें वह जम्मू-कश्मीर के नौगाम सैक्टर में तैनात थे। शुक्रवार रात्रि को बबलू सिंह अपनी टुकड़ी के साथ नौगाम सेक्टर में निगरानी ड्यूटी पर थे। तभी आतंकियों ने जवानों पर हमला कर दिया। जवानों ने भी मोर्चा संभाल लिया। इसमें झंडीपुर के बबलू ने भी आतंकियों से जमकर लोहा लिया। भारतीय जवानों की टुकड़ी ने दो आतंकियों को मार गिराया।

दो जवान भी शहीद हो गए। इनमें एक बबलू भी शामिल थे। एडीएम प्रशासन अजय कुमार अवस्थी और सेना की स्ट्राइक वन कोर के एडम कमांडर संदीप शर्मा ने बताया कि उनका पार्थिव शरीर आज रविवार को तीन बजे आर्मी हेलीपेड मथुरा पर आएगा। वहां से सेना की गाड़ी से बबलू सिंह का पार्थिव शरीर उनके मूल गांव झंडीपुर ले जाया जाएगा। वहां शाम पांच बजे अंतिम संस्कार कर सलामी दी जाएगी। 
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बबलू के परिवार में पिता मलूक सिंह के अलावा पत्नी रविता देवी, पुत्र दरुणा चौधरी (5) और पुत्री गरिमा (3) हैं। उनकी मां का निधन हो चुका है। वर्तमान में परिवार मथुरा के बालाजीपुरम में रह रहा है। अंतिम बार बबलू बीती 23 जून को छुट्टी पर घर आए थे। वे करीब एक हफ्ते तक परिवार के साथ रहे।  

गांव में सभी के चहेते थे बबलू
बबलू गांव में सभी के चहेते थे। जैसे ही लोगों को जानकारी मिली उनके घर पर भीड़ लग गई। साथियों का कहना था कि बबलू हमेशा से जांबाज थे। जब भी छुट्टी आते थे गांव के लड़कों से सेना में जाने को कहते थे। बबलू का कहना होता था कि देश की सेवा करने का सबसे अच्छा मौका सेना में ही मिलता है। सेना की वर्दी पहनकर ही सीना चौड़ा हो जाता है। गांव के लोगों ने बताया कि अभी कुछ दिन पहले ही बबलू गांव में आए थे और काफी समय सभी के साथ बिताया। 
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