गांव रामताल स्थित प्राचीन कुंड की खोदाई का कार्य अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की देखरेख में होगा। उत्खनन में मिले अवशेषों से कुंड के कुषाणकालीन होने की संभावना व्यक्त की गई है। सोमवार को एएसआई आगरा मंडल के अधिकारियों ने कुंड के निरीक्षण के बाद इसकी जानकारी दी।
एएसआई आगरा मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद डा. भुवन विक्रम के नेतृत्व में अधिकारियों में की टीम कुंड का निरीक्षण करने पहुंची थी। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े होने के कारण संस्था द ब्रज फाउंडेशन कुंड का जीर्णोद्धार करा रही है। संस्था के पदाधिकारियों ने एसएसआई को यहां उत्खनन में पुरातात्विक वस्तुएं मिलने की सूचना दी थी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण एक दीवार का मिलना है।
सोमवार को निरीक्षण करने वाली टीम में उपअधीक्षण पुरातत्वविद केए काबुई, सहायक पुरातत्वविद डा. अर्पित प्रधान, डा. महेंद्र पाल भी शामिल थे। निरीक्षण के बाद पत्रकार वार्ता में डा. भुवन विक्रम ने बताया कि यहां अब तक मिले अवशेषों से रामताल कुंड के लगभग 1800 वर्ष पुराना होने के संकेत मिल रहे हैं।
इसलिए यह कुंड कुषाणकालीन प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि एसएसआई आगामी दो सप्ताह तक ऐतिहासिक धरोहर को खोजने के लिए अभियान चलाएगा। यहां मिलीं ईंटों और अन्य अवशेषों से इसके सही कालखंड की पुष्टि की जाएगी। साथ ही एएसआई की देखरेख में खोदाई का कार्य संस्था करेगी।
प्रोजेक्ट मैनेजर विपिन व्यास ने बताया कि कुंड की खुदाई के दौरान एक नींव सामने आई है करीब 30 मीटर लंबी है। नींव में प्रयोग की गई ईंट 14 इंच लंबी और नौ इंच चौड़ी हैं। नींव के नीचे एक -दो सेमी मोटी लोहे की चादर भी बिछी है। निरीक्षण के दौरान संस्था के अध्यक्ष विनीत नारायण ने एएसआई अधिकारियों के साथ चर्चा कर कुंड की भावी योजनाओं पर मंथन किया। संस्था के सचिव रजनीश कपूर, मनसुख सिंह, प्रेम सिंह आदि उपस्थित थे।