शांति और सद्भावना के लिए कन्याकुमारी से शुरू हुई आशा यात्रा 16 मई को कश्मीर के श्रीनगर में पहुंचकर समाप्त होगी।
हर नगर और शहर में मिल रहे समर्थन से प्रफुल्लित श्रीएम ने शुक्रवार को पत्रकारों से वार्ता की और कहा कि देश में सहिष्णुता और असहिष्णुता पर बहस चल रही है लेकिन देश में असहिष्णुता कहीं नहीं दिखाई देती। आज प्यार और सद्भावना भारत के गांव-गांव में बस रही है।
अफसोस की बात यह है कि देश का युवा प्रेम और सौहार्द में जी रहा है और बुजुर्ग देश असहिष्णुता को खोज रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी युवाओं को साथ लेकर ही तरक्की और विकास का रास्ता तय करने की सोची है। उन्होंने कहा कि मानव प्रेम से ही देश में शांति के साथ विकास की राह को पाया जा सकता है। इसके लिए स्कूली बच्चों को संस्कारित करना बहुत जरूरी है।
राजनीतिक लोगों ने असहिष्णुता को बनाया मुद्दा: राज
बॉलीवुड की फिल्म लगान में इस्माइल की भूमिका निभाने वाले राज भी आशा यात्रा का हिस्सा हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि प्रेम और सद्भाव के दर्शन भारत में पैदल यात्रा से किए जा सकते हैं।
विभिन्न संस्कृतियों वाले इस देश में सभी का लक्ष्य आपसी भाईचारा है। असहिष्णुता को राजनीतिक लोगों ने मुद्दा बना दिया है। जिस देश में ‘अतिथि देवो भव:’ का भाव हो वहां असहिष्णुता नहीं हो सकती।