मथुरा। असद उर्फ फाती ने 24 साल पहले छैमार गिरोह बनाया था। इससे पहले वह बावरिया गिरोह के लिए काम करता था। असद का जहां डेरा रहता था, उसके आसपास के जिलों को छोड़कर अन्य प्रदेशों और जिलों में वारदात को अंजाम देता था।
सूत्रों के अनुसार कन्नौज के तिर्वा के बिनौरा रामुपर गांव निवासी सलीम बावरिया के साथ असद काम करता था। गिरोह बढ़ने के बाद सलीम ने सन 1999 में बावरिया गैंग शुरू की। बावरिया गैंग लूट, डकैती, हत्याएं व अन्य जघन्य अपराध को अंजाम देता था। इसके बाद साल बाद असद ने घुमंतू व छैमार जाति का गठजोड़ करके अपना छैमार गैंग बना लिया। 24 साल में असद ने छैमार गैंग को इतना बड़ा लिया कि देश के विभिन्न राज्यों में वारदात को अंजाम देने लगा।
जानकारी के अनुसार, इनकी गिरफ्तारी के लिए विभिन्न राज्यों की पुलिस जब तिर्वा जाने लगी तो छैमार गैंग ने वहां से डेरा हटा लिया। फिर ये गैंग अलग-अलग स्थानों पर डेरा जमाकर वारदात को अंजाम देने लगा। वर्तमान में तिर्वा में डेरा की जमीन पूरी तरह से खाली बताई जा रही है। हालांकि पुलिस असद के पता की खोज में अभी भी उलझी हुई है।