महर्षि दयानंद भवन में आयोजित आर्य समाज के वार्षिकोत्सव के तीसरे दिन वेद ज्ञान के महत्व को इंगित किया गया। आर्य विद्वान आनन्द पुरुषार्थी ने कहा है कि संसार में वेद विद्याओं से ही नई-नई टेक्नोलाजी विकसित हो रही है।
सभी देश वेद ज्ञान से लाभ उठा रहे हैं। भारत सरकार ने भी आर्यसमाज की कुछ मांगों को स्वीकार कर कानून बना दिया है।
उन्होंने कहा कि सती प्रथा, भ्रूण हत्या पर रोक, नारी सशक्तिकरण, महिलाओं को आरक्षण आदि कानून आर्यसमाज की ही देन है।
आचार्य राजदेव ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, योगीराज श्रीकृष्ण के आचार-विचार श्रेष्ठ थे, वह आर्य पुत्र थे। बालकिशन बेधड़क, रामवीर आर्य ने कहा कि संसार आज आर्यसमाज की ओर देख रहा है।
राष्ट्र ऊंचे आचार-विचारों से बनता है। बहन राजकुमारी ने यज्ञ का महत्व बताया। डा. अमर सिंह पौनिया, इंदी सिंह, भानुप्रताप सिंह, शरद आर्य गिडोहिया, ओमप्रकाश आर्य, वेदप्रकाश कोटवनिया, राजेन्द्र आर्य, वीरेन्द्र आर्य, तेजप्रकाश आर्य, विजय आर्य उपस्थित रहे।