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ध्रुपद समारोह में कलाकारों ने दी प्रस्तुति

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ध्रुपद समारोह में कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार - फोटो : VRINDAVAN
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वृंदावन (मथुरा)। जयसिंह घेरा में विदुर मल्लिक संगीत सेवा धाम चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा ध्रुपद समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दिल्ली के प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित राजेंद्र प्रसन्ना एवं ऋषभ प्रसन्ना ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीवत्स गोस्वामी महाराज ने सुप्रसिद्ध ध्रुपद गायक स्व. पं. विदुर मल्लिक के चित्र पट पर माल्यार्पण से साथ किया। इस मौके पर श्रीवत्स गोस्वामी ने कहा कि ध्रुपद भारतीय शास्त्रीय संगीत की सबसे प्राचीन गायकी है। इस लुप्त होती गायकी को बचाने के लिए गंभीरा स्थित संगीत गुरुकुल संस्थान में स्व. प. विदुर मल्लिक जी ने 30 वर्षों तक सेवाएं दीं। अनेक देशी-विदेशी शिष्यों को ध्रुपद गायन की शिक्षा प्रदान की। स्व. मल्लिक जी भारत के उन गिने चुने ध्रुपद गायकों में से एक थे, जिन्होंने भारत ही नहीं अपितु विदेशों में भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्राचीन विधा ध्रुपद गायकी का प्रतिनिधित्व किया। आज खुशी है कि उनके सुपुत्र पंडित आनंद कुमार मल्लिक, पं. विदुर मल्लिक संगीत सेवा धाम चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से ध्रुपद की गायकी की इस विधा को बचाने को आगे आए हैं।
इस दौरान तबले पर संगति बनारस से आए तबला वादक श्रुतिशील उध्दव ने की। अंत में दरभंगा घराने गायकी के द्रुपद गायक स्व. पंडित विदुर मल्लिक के सुपुत्र आनंद कुमार मल्लिक एवं पौत्र अमित मल्लिक, असित मल्लिक ने राग बागेश्वरी में द्रुपद, राग जैजैवन्ती में धमार, राग शंकरा धमार और राग अडाना में एक सुर ताल गाकर कार्यक्रम का समापन किया। इनके साथ पखावज पर श्रीकृष्ण गोपाल शर्मा ने प्रदान की।
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