चतु: संप्रदाय विरक्त वैष्णव परिषद की बैठक में मधुमंगल शुक्ला के स्वयं को महंत घोषित करने पर निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। चैतन्य कुटी पर गुरुवार को महंत तुलसीदासाचार्य विष्णुदेवाचार्य महाराज की अध्यक्षता में हुई बैठक में महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज और महंत रामस्वरूप ब्रह्मचारी ने बताया कि विरक्त संत या महंत बनने पर ही आम व्यक्ति अपने नाम के साथ दास या शरण लिख सकता है लेकिन मधुमंगल शुक्ला ने सारी धार्मिक मर्यादा लांघकर अपना नाम महंत मधुमंगल शरण दास शुक्ल रखा है जो कि सर्वथा अनुचित है। उन्हाेंने कहा कि मधुमंगल शुक्ला ने महंत बनने के लिए किसी अखाडे़ से मान्यता या अधिकार प्राप्त नहीं किया है।
श्रीपंच झाड़िया निर्मोही अखाड़ा के महंत सुंदरदास और श्रीपंच राधाबल्लभिया निर्मोही अखाड़ा के महंत लाड़ली शरण दास ने कहा कि संत समाज के सभी अखाड़े और चार संप्रदाय मिलकर ही योग्य व्यक्ति को महंताई की चादर ओढ़ाते है लेकिन मधुमंगल शुक्ला को किसी भी संत या संप्रदाय ने महंताई नहीं दी।
श्रीहरि व्यासी महानिर्माणी निर्मोही अखाड़ा के महंत गोपी कृष्णदास और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष मंहत हरिशंकर दास नागा ने कहा कि संत समाज की ओर से इस मामले में जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में आचार्य रामनिहोर त्रिपाठी, आचार्य बद्रीश, महंत रामदास, महंत सुखदेव दास, महंत विष्णुदास, महंत लक्ष्मणदास, महंत मोहिनीशरण दास, गोपेश गोस्वामी आदि उपस्थित रहे।