बलदेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर हुई नेत्र परीक्षण अधिकारियों की भर्ती में घालमेल के मामले में अपर निदेशक स्वास्थ्य ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को प्रेषित कर दी है। बताए अनुसार इस रिपोर्ट में नियुक्ति पत्र जारी करने वाले अफसर, ज्वाइनिंग कराने वाले चिकित्सा अधिकारी को दोषी माना गया है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन केे तहत संचालित आशीर्वाद बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना में प्रत्येक ब्लाक स्थित सीएचसी, पीएचसी पर चिकित्सकों की टीम के लिए लगभग डेढ़ वर्ष पहले भर्ती हुई थी। बल्देव स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर दो नेत्र परीक्षण अधिकारियों के स्थान पर तीन की भर्ती कर दी गई। अमर उजाला ने दो जुलाई के अंक में इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
शासन ने इस मामले की अपर निदेशक स्वास्थ्य स्तर से जांच कराई है। इसकी रिपोर्ट शासन को प्रेषित कर दी गई है। सूत्र बताते हैं कि इसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय को दोषी माना गया है। रिपोर्ट में नियुक्ति पत्र जारी करने वाले अधिकारी, ज्वाइनिंग कराने वाले अफसरों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
चिकित्सा प्रभारियों से हो चुकी है रिकवरी
मथुरा। इसी मामले में एसीएमओ डा. सज्जन कुमार, डा. महाराज सरीन के नेतृत्व में हुई जांच की रिपोर्ट में पूरे प्रकरण पर लीपापोती का प्रयास किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सौंपी गई रिपोर्ट में नेत्र परीक्षण अधिकारी संजय कुमार पर तत्कालीन एनआरएचएम पटल सहायक आरएन शर्मा के साथ दुरभि संधि कर गलत तरीके से नियुक्ति पत्र जारी कराने की बात कही गई। इतना ही नहीं ज्वाइनिंग कराने वाले प्रभारी चिकित्सक डा. एके श्रीवास्तव को भूलवश गलती करने के कारण निर्दोष बताया गया है।
जांच में चयन करने वाले बोर्ड में मौजूद अफसरों, नियुक्ति पत्र जारी करने, ज्वाइनिंग लेटर पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों का जिक्र तक नहीं है। इस रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. बीएस यादव ने बलदेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी रहे डा. गोपाल गर्ग और डा. बिजेंद्र सिसौदिया से 1,40,580 रुपये रुपये की वसूली कर एनआरएचएम खाते में जमा कराया था।
शासन के निर्देश के क्रम में हमने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश कर दी है। जांच रिपोर्ट गोपनीय होती है उसके बार में नहीं बताया जा सकता है।
- डा. सत्यमित्र, अपर निदेशक स्वास्थ्य, आगरा