मथुरा नगर निगम ने अपनी ही जमीन पर कॉलोनी बसाने के लिए एनओसी दे दी। एमवीडीए ने एनओसी जारी होने पर नगर निगम को पत्र भेजकर उनकी गलती का अहसास कराने का भी प्रयास किया, लेकिन नगर निगम ने अपनी आंखें मूंद लीं। अब पार्षद दल ने मामले की शिकायत कर कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
मामला नगर निगम क्षेत्र के मौजा गोविंदपुर का है। यहां खसरा संख्या 74क, 74ख, 75क और 75ख की भूमि नगर निगम व अन्य दो लोगों के नाम दर्ज है। इस जमीन में अपना हिस्सा अलग करवाने के लिए सह खातेदारों ने एसडीएम सदर न्यायालय में वाद दायर किया था। सुनवाई के बाद एसडीएम सदर ने 1 नवंबर 2021 को भूमि का बंटवारा करने का आदेश जारी कर दिया। नगर निगम ने इस आदेश के खिलाफ अपर आयुक्त द्वितीय आगरा मंडल के न्यायालय में अपील की थी। अपील पर सुनवाई के बाद 1 अगस्त 2023 को न्यायालय ने एसडीएम सदर न्यायालय का आदेश निरस्त करते हुए दोबारा सुनवाई करने के आदेश दिए थे।
इसके दो माह बाद ही 4 अक्तूबर 2023 को नगर निगम ने बिना न्यायालय के निर्णय के ही सह खातेदारों को कॉलोनी बसाने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दिया। एक तरफ नगर निगम अपनी जमीन पाने के लिए न्यायालय में मुकदमा लड़ता रहा और दूसरी तरफ गुपचुप तरीके से एनओसी भी जारी हो गई। अब इस भूमि पर कॉलोनी बसाई जा रही है, लेकिन नगर निगम इससे बेखबर है। लेकिन पार्षद दल ने अब इस मामले को उठाया है। नेता पार्षद दल राजवीर सिंह, पार्षद नीनू कुंजबिहारी भारद्वाज, ठाकुर तेजवीर सिंह, नीरज वशिष्ठ, ब्रजेश खरे और राकेश भाटिया ने इसकी शिकायत नगर आयुक्त से की है। उन्होंने जांच करवाकर नगर निगम की जमीन हो रहे अवैध निर्माण को रोकने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
एमवीडीए के सचिव का पत्र भी किया अनदेखा
नगर निगम से एनओसी लेने के बाद कॉलोनी का नक्शा पास कराने के लिए एमवीडीए में आवेदन किया गया था। एनओसी मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) पहुंची तो सचिव को इस पर संदेह हुआ। उन्होंने 6 दिसंबर 2023 को न्यायालय के आदेश व मामले की पूरी जानकारी के साथ एक पत्र नगर निगम को भेजा। इसमें उन्होंने स्पष्ट कहा था कि ये एनओसी नगर निगम के हितों के विपरीत प्रतीत होती है। इसके बाद भी नगर निगम की नींद नहीं टूटी और न ही वापस कोई जवाब एमवीडीए को भेजा गया।
जांच के दिए हैं आदेश
नगर आयुक्त शशांक चौधरी ने बताया कि पार्षदों की शिकायत के बाद मामला संज्ञान में आया है। प्रकरण पुराना है, इसीलिए जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जांच के लिए सहायक नगर आयुक्त राकेश त्यागी को जिम्मेदारी सौंपी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।