मथुरा। इस वक्त बंदर और कुत्ते का काटना खतरनाक ही नहीं महंगा भी साबित हो सकता है। मथुरा और वृंदावन के बड़े अस्पतालों में एंटी रैबीज इंजेक्शन खत्म हो गए हैं। इसके चलते मरीज अस्पताल से लौट रहे हैं। ऐसे में मरीजों को इन महंगे इंजेक्शन की बाजार से खरीद करनी पड़ रही है।
जिला अस्पताल में हर दिन कई मरीज कुत्ता और बंदरों से काटने के बाद एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचते हैं। इसमें 20 प्रतिशत मरीज बंदरों से प्रभावित होते हैं, जबकि बाकी 80 प्रतिशत मरीज कुत्तों के काटने का शिकार होते हैं। बाजार में महंगी कीमत वाले ये इंजेक्शन जिला अस्पताल सहित ग्रामीण अंचलों के सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क लगाए जाते हैं।
ग्रामीण अंचल के अस्पतालों में इनकी उपलब्धता कम होने के कारण अधिक दबाव जिला अस्पताल पर ही रहता है। पिछले दो दिन से जिला अस्पताल के साथ वृंदावन के संयुक्त जिला अस्पताल में भी एंटी रैबीज इंजेक्शन खत्म हो गए हैं। इससे इंजेक्शन के लिए यहां पहुंचने वाले मरीज निराश लौट रहे हैं। यहां लोगों को बाजार का रास्ता दिखाया जा रहा है।
एंटी रैबीज इंजेक्शन खत्म हो गए हैं। इसकी सूचना आपूर्ति करने वाली एजेंसी को दे दी गई है। एक सप्ताह में इंजेक्शन आने की संभावना है। इस स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
- डॉ. केके गुप्ता, सीएमएस, संयुक्त जिला अस्पताल