मथुरा। नगर निगम के पार्षदों का आक्रोश यूं ही नहीं फूटा, वे महापौर और नगर आयुक्त की कार्यप्रणाली को लेकर बेहद खफा हैं। नाराज पार्षदों में न सिर्फ विपक्षी दलों के, बल्कि भाजपा के पार्षद भी हैं। उनका गुस्सा एक दिन में तैयार नहीं हुआ है। गुस्से का गुबार पिछले दिनों निगम में हुए कई घटनाक्रमों से उपजा है।
नाराज भाजपा महिला पार्षद दीपिका रानी का कहना कि उनके वार्ड में तमाम समस्याएं तो हैं ही, साथ ही एक बड़े भूखंड को निगम ने पहले खाली कराया, उसके बाद एक भाजपा नेता ने निगम का बोर्ड हटाकर कब्जा कर लिया है। इसकी शिकायत की गई, परंतु किसी ने ध्यान नहीं दिया।
भाजपा पार्षद नीलम गोयल ने बताया कि निगम में महिला पार्षदों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। महापौर सुनने को तैयार नहीं होते, आखिरकार हम अपनी बात कहने कहां जाएं। भाजपा पार्षद हेमंत अग्रवाल का कहना है कि हर दो माह में बोर्ड और हर माह कार्यकारिणी समिति की बैठक का प्रावधान है,
परंतु पिछले तीन साल में कुल सात बैठकें ही हुईं है, जो सिर्फ बजट पास कराने के लिए हुई हैं। पार्षदगण किन समस्याओं से जूझ रहे हैं, इसकी किसी को फिक्र नहीं है। विगत दिनों राशन कार्ड को लेकर सर्वे हुआ, किट का सर्वे हुआ। पार्षदों ने पूरा योगदान किया, परंतु निगम अधिकारी कोई जवाब नहीं देते। छोटी समस्याओं को तो कोई सुनने वाला भी नहीं है।
भाजपा पार्षद राजेश सिंह पिंटू ने बताया कि निगम अधिकारी और महापौर पार्षदों की समस्याओं पर कतई ध्यान नहीं देते हैं। कांग्रेस पार्षद रीतेश पाठक ने बताया कि यदि समस्याओं की ओर ध्यान दिया होता तो शायद यह स्थिति नहीं आती। निगम अधिकारी बोर्ड बैठक में सिर्फ बजट पास कराना चाहते थे। रालोद पार्षद माला माहौर का कहना है कि नगर निगम में वार्डों की समस्याओं की कोई सुनवाई नहीं होती है, उन्होंने कई दफा नगर आयुक्त और महापौर से शिकायत की है, लेकिन हर बार टाल दिया जाता है।
गुपचुप बना दी पांच लाख से कम के कार्यों की समिति
पांच लाख रुपये से कम लागत के विकास कार्यों की संस्तुति के लिए निगम में गुपचुप समिति बना दी गई। इसमें अपने मनमाफिक तीन पार्षदों को ले लिया। इससे भी अन्य पार्षद नाराज थे।
हर वार्ड में चल रहे विकास कार्य
महापौर मुकेश आर्यबंधु का कहना है कि हर वार्ड में विकास कार्य चल रहे हैं। पानी, बिजली, सड़क का काम लगातार हो रहा है। हम कोरोना काल में भी सफाई पर लगातार ध्यान दे रहे हैं।