प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को पॉलीथिन का उपयोग प्रतिबंधित किया लेकिन धर्मनगरी मथुरा-वृंदावन के लिए हाईकोर्ट इस पर पहले प्रतिबंध लगा चुका है। कोर्ट के आदेश को आगे बढ़ाते हुए जिला प्रशासन ने बाकी हिस्सों में भी प्रतिबंध को प्रभावी किया था, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ।
धर्म और आस्था की नगरी मथुरा में पॉलीथिन के उपयोग को लेकर लंबे समय से हाईकोर्ट के आदेश की खुली अवहेलना हो रही है। यमुना प्रदूषण के मुद्दे पर महेंद्रनाथ चतुर्वेदी की याचिका में हाईकोर्ट ने मथुरा-वृंदावन में पॉलीथिन को प्रतिबंधित किया था।
इस आदेश के बाद डीएम राजेश कुमार ने यह प्रतिबंध ग्राम पंचायत और अन्य निकायों में भी प्रभावी कराया। इसके साथ ही बडे़ स्तर पर पॉलीथिन के खिलाफ जिला मुख्यालय के अलावा तहसील स्तर और कस्बा में अभियान चलाए गए। दुकानदारों से न केवल पॉलीथिन जप्त की गई, बल्कि जुर्माना भी लगाया गया। यह अभियान चंद दिन चलने के बाद बंद हो गया।
लोगों ने एक बार फिर खुलेआम पॉलीथिन का उपयोग शुरू कर दिया है। छोटे और बडे़ सभी दुकानदार फिर से पॉलीथिन का उपयोग करने लगे हैं। जिले के अफसरों ने भी इसे अब भुला दिया है। अब प्रदेश स्तर पर यह प्रतिबंध लगा है तो जनपद के अफसरों की नींद भी टूटेगी।
एसडीएम ने दुकानों से जब्त की पालीथिन
गोवर्धन। कस्बा के मुख्य बाजार में अतिक्रमण हटवाने निकले एसडीएम और तहसीलदार ने पॉलीथिन और प्लास्टिक का सामान जब्त कर लिया। दो दुकानों से बड़ी मात्रा में प्लास्टिक गिलास और दौना जब्त कर जुर्माना वसूला गया। शुक्रवार शाम को एसडीएम विश्वभूषण मिश्रा, तहसीलदार बृजपाल सिंह यादव नगर पंचायतकर्मियों और थाना पुलिस के साथ बाजार में अतिक्रमण हटवाने पहुंचे थे।
सब्जी मंडी के निकट दो दुकानों पर रखे प्लास्टिक के गिलास और दौना के बंडलों को उन्होंने जब्त कर लिया। इस पर दुकानदार शटर बंद कर भाग खड़े हुए। थोड़ी देर में पूरा बाजार बंद हो गया। कार्रवाई के दौरान व्यापारियों की भीड़ एकत्रित हो गई। नगर पंचायत कार्यालय पर व्यापारियों से एसडीएम ने प्लास्टिक सामान और पॉलीथिन की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने को कहा। दुकानदार किशन और महेश से जुर्माना वसूल कर छोड़ दिया।