15 साल पहले वृंदावन कोतवाली क्षेत्र के सुनरख इलाके में एक प्लाट पर विवाद में सीओ महावन अजय कुमार पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। मामले में डीजी कार्यालय ने जांच के आदेश दिए थे, साथ ही अभिलेखों सहित उपस्थिति को कहा था। लेकिन सीओ ने न जांच रिपोर्ट दी न उपस्थित हुए। सीओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
भूमि का विवाद विकास अरोड़ा और मुनीष कुमार गौतम के बीच का है। गांव सुनरख निवासी विकास अरोड़ा ने विवाद को लेकर शिकायती पत्र भेजा था। इसमें कहा गया था कि उन्होंने सन् 2000 में सुनरख में 2,384 वर्ग गज जमीन खरीदी। इस पर प्राचीन भारतीय वैदिक संस्था का कार्यालय बनाया और धर्म का प्रचार-प्रसार शुरू किया। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों में उनको जेल हो गई। इस दौरान मुनीष कुमार गौतम निवासी दिल्ली और उसके साथी जमीन पर काबिज हो गए।
शिकायत पर अपर पुलिस महानिदेशक मुख्यालय भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने मामले की जांच सीओ महावन अजय कुमार को सौंपी। पत्रावली सहित 29 जून को कार्यालय में उपस्थित होने के आदेश किए। इसकी सूचना पूर्व में लिखित दी गई और टेलीफोन पर 22 जून को अवगत कराया गया। लेकिन सीओ महावन ने न तो डीजीपी कार्यालय को कोई जांच रिपोर्ट सौंपी और न उपस्थित हुए।
पुलिस महानिदेशक लोक शिकायत प्रकोष्ठ मुथा अशोक जैन ने अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था और एसएसपी को इस बारे में अवगत कराया। उन्होंने सीओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश किए हैं। बताते चलें कि विकास अरोड़ा पुलिस की माफिया सूची में शामिल है।
विकास अरोड़ा और मुनीष कुमार गौतम के जमीन के विवाद में विवेचना अभी जारी है। इसमें जमीनी विवाद से जुड़े दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। विकास अरोड़ा माफिया घोषित है और पूर्व एसएसपी रहे भानू भास्कर ने उसे जेल भेजा था। वहीं दूसरे पक्ष के मुनीष कुमार गौतम के भी चरित्र और आपराधिक मामलों की जांच कराई जा रही है। कुछ मामले ट्रायल पर भी हैं। उच्च अधिकारियों को अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामले से अवगत करा दिया है। जो दोषी होगा उसके खिलाफ रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
-अजय कुमार, सीओ महावन