नगर पालिका मथुरा में एसटीपी संचालन से जुडे़ 1.74 करोड़ के मामले में डीएम ने परीक्षण रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इसमें दोषपूर्ण टेंडर प्रक्रिया के लिए चेयरमैन और ईओ को जिम्मेदार बताया है। उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है।
दो साल पहले सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन ने मथुरा नगर पालिका में एसटीपी के संचालन पर सवाल खडे़ करते हुए 1.74 करोड़ रुपये के घपले का आरोप लगाया था। एडीएम कानून व्यवस्था के स्तर से की गई जांच में आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने चेयरमैन मनीषा गुप्ता और अधिशासी अधिकारी रहे केपी सिंह को आरोप पत्र जारी किए। दोनों के जवाब मिलने के बाद शासन ने डीएम को परीक्षण रिपोर्ट देने का आदेश दिया था।
कई माह तक चली इस परीक्षण प्रक्रिया के बाद अब डीएम नितिन बंसल ने शासन को परीक्षण रिपोर्ट भेज दी है। इसमें एसटीपी संचालन के लिए दिए गए टेंडर की प्रक्रिया को दोषपूर्ण माना है। इसके लिए चेयरमैन और ईओ को जिम्मेदार बताते हुए कार्रवाई की संस्तुति की है।
एनजीटी में पहुंचा यह मामला
यमुना के प्रदूषण की मुख्य वजह बना मथुरा नगर पालिका का लापरवाह पूर्ण संचालन का मसला एनजीटी तक जा पहुंचा है। एनजीटी ने इस बिंदु पर पालिका से जवाब मांग लिया है। अब तक पालिका इसका जवाब देने में टालमटोल कर रही थी। अगली सुनवाई आठ मार्च को होनी है। इसमें 1.74 करोड़ से जुड़ी अनियमितता में हुई कार्रवाई की ही जानकारी एनजीटी ने मांगी है।
मथुरा-वृंदावन में एसटीपी संचालन में घपला
मथुरा के साथ वृंदावन नगर पालिका भी एसटीपी संचालन में वर्षों से लापरवाही बरत रही हैं। कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासनिक अफसरों की जांच में यह स्थिति सामने भी आ चुकी है, लेकिन पालिका की कार्यप्रणाली में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। सिर्फ एसटीपी की क्षमता और पानी की अधिकता के आंकड़े के आधार पर अपनी लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश होती है।