मथुरा। छह मृत पेंशनरों के फर्जी जीवित प्रमाण पत्र लगाकर उनकी पेंशन की 1.62 करोड़ रुपये की धनराशि अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कराने के आरोपी को जिला एवं सत्र कोर्ट से राहत नहीं मिली है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकास कुमार ने घोटाले के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। आरोपी 25 मई से जिला कारागार में बंद है। उसने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।
जनवरी माह में महालेखाकार (एजी) पेंशन प्रयागराज की टीम ने जांच में खुलासा किया कि कोषागार के सहायक लेखाकार अभिषेक श्रीवास्तव ने 2020 से 2026 तक छह मृत पेंशनरों को जिंदा दर्शाते हुए 1.62 करोड़ रुपये अपने खाते में ट्रांसफर कराए हैं। सदर पुलिस ने इस मामले में सहायक लेखाकार अभिषेक श्रीवास्तव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली।
पुलिस ने जांच तेज की तो 25 मई को उसने सदर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया। यहां से उसे जेल भेज दिया। जेल में बंद घोटाले के आरोपी सहायक लेखाकार ने अधिवक्ता के माध्यम से जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की। शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जमानत अर्जी पर सुनवाई की। डीजीसी क्राइम की दलील, पुलिस रिपोर्ट समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकास कुमार ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी।