व्यासपीठ का पूजन करते बाबा रामदेव
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वृंदावन(मथुरा)। श्री मलूकपीठ बिहारी सेवा संस्थान में संत श्री मलूकदास जी महाराज की 451वीं जयंती के पावन अवसर पर चल रहे महोत्सव के सप्तम दिवस को भक्ति, आध्यात्मिकता और सनातन धर्म की गरिमा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों में योगगुरु बाबा रामदेव और कार्ष्णि पीठाधीश्वर गुरु शरणानंद महाराज सम्मिलित हुए। दोनों संतों ने श्री मलूकदास जी की समाधि पर पूजन किया और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा के समापन दिवस पर श्रीमज्जगद्गुरु द्वाराचार्य एवं पीठाधीश्वर डॉ. राजेन्द्र दास देवाचार्य महाराज ने मुक्ति खंड पर प्रवचन करते हुए कहा सच्चा धर्म वही है जो व्यक्ति को राग-द्वेष त्यागकर आत्ममुक्ति की ओर ले जाए। भागवत कथा का श्रवण तभी सार्थक है जब जीवन में उसका अमल हो। बाबा रामदेव ने अपने उद्बोधन में सनातन धर्म पर हो रहे षड्यंत्रों के विरुद्ध एकजुटता की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा भारत आज आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक आतंकवाद का सामना कर रहा है। हमें अपनी शक्ति, संयम और संगठन से इन सनातन विरोधी ताक़तों का मुकाबला करना होगा। उन्होंने संत मलूकदास जी को महान आचार्य बताते हुए कहा कि विश्व को दिशा भारत से ही मिलेगी।
गुरु शरणानंद महाराज ने गुरु महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिना गुरु के भगवत कृपा पाना भवसागर पार करने जैसा है। प्रत्येक व्यक्ति को गुरु दीक्षा लेकर उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए। महोत्सव में संत गोरेलाल पीठाधीश्वर महाराज, संत लाडली शरण महाराज, रसिक माधव दास महाराज, गोपेश बाबा, अनुराग दास महाराज, धनंजय दास आदि मौजूद रहे।
धूमधाम से निकाली गई शोभायात्रा
मलूक दास महाराज की 451वीं जयंती के समापन दिवस पर नगर में भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई। इसमें गणेश जी, हनुमान जी, शंकर-पार्वती, राधा-कृष्ण सहित अनेक देवी-देवताओं की सुंदर झांकियां शामिल रहीं। शोभायात्रा में पूज्य मलूक पीठाधीश्वर श्री राजेंद्र दास जी महाराज और अन्य संतजन शामिल हुए। नगर भ्रमण के दौरान जगह-जगह भक्तों और श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया।