मथुरा। डीएम के आदेश के बाद भी अधिकारी कारगुजारी से बाज नहीं आ रहे। शहर में घनी आबादी के बीच मोबाइल टावर लगाए जाने के मामले में नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय ने चुप्पी साध ली है। शिकायतकर्ता एक बार फिर जिलाधिकारी के समक्ष संपूर्ण मामले को रखने की तैयारी में है।
नगर पालिका ने उच्च न्यायालय के आदेशों को ताक पर रखकर शहर में 14 स्थानों पर एक निजी मोबाइल कंपनी को ग्राउंड बेस्ड मास्ट टावर लगाने की अनुमति प्रदान कर दी है। इसके बाद कंपनी अफसरों ने आनन-फानन में शहर में टावर लगाए जाने का कार्य शुरू कर दिया। महोली रोड स्थित माधवपुरी कॉलोनी के लोगों ने इसका विरोध किया।
मामले में नगर पालिका के पूर्व सभासद राजीव कुमार सिंह ने 20 जून को डीएम बी चंद्रकला से शिकायत की। पत्र में अवगत कराया गया कि एक तरफ नगर पालिका ने मोबाइल टावर से निकलने वाले रेडिएशन के चलते लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया है तो दूसरी ओर पालिका को राजस्व की भारी क्षति पहुंचायी है।
पत्र में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप देख डीएम ने तत्काल मामले की जांच नगर मजिस्ट्रेट डा. राजेश प्रजापति को सौंप दी और दस दिन के अंदर रिपोर्ट देने के आदेश दिए। हैरानी की बात ये है इस जांच को सौंपे डेढ़ माह से अधिक हो गया है लेकिन आज तक जांच शुरू ही नहीं हो पाई है। इधर मोबाइल कंपनी तेजी के साथ टावर लगाए जाने का कार्य कर रही है।
हाईकोर्ट ने लगा रखी है रोक
मथुरा। इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने गोरखपुर निवासी सुदामी देवी की याचिका पर सुनवाई के दौरान स्पष्ट आदेश दिए हैं कि किसी प्रकार का मोबाइल टावर स्कूल, अस्पताल या फिर रिहायशी क्षेत्र के 100 मीटर की परिधि में नहीं लगाया जा सकता है। बावजूद इसके न्यायालय के आदेश का दरकिनार कर शहर में इस कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। ऐसे में अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध नजर आती है।