मथुरा। यमुना को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने और उसमें निर्मल जल की अविरल धारा प्रवाहित कराने के लिए शुरू किया गया आंदोलन एक बड़ा मुद्दा बन गया। देशभर में यमुना मुक्ति की आवाज गूंजी तो हर बड़े नेता ने अपनी चुनावी सभाओं में यमुना को निर्मल और स्वच्छ कराने का वादा ब्रजवासियों से किया। अब जबकि वादे को पूरा करने के लिए नेताओं पर दबाव बनाने का वक्त आ रहा है तो यमुना मुक्ति की आवाज को बुलंद करने वाले लोगों के बीच मतभेद गहरा गए हैं। सबके अलग अलग संगठन बन गए हैं। ऐसे में चिंता है तो बस यही कि इनके आपसी घमासान में यमुना मुक्ति की लड़ाई कमजोर न पड़ जाए।
2011 में शुरू हुआ यमुना मक्ति आंदोलन का कारवां लगातार बढ़ता गया और एक मार्च 2013 को राधा रानी यमुना मुक्ति यात्रा में लाखों लोग शामिल हुए। यात्रा वृंदावन से दिल्ली सीमा की सीमा में पहुंची तो पूर्व केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत पद यात्रियों के बीच पहुंचे थे और एक मसौदा तैयार हुआ। समझौते के बाद पद यात्री लौट आए। इस समझौते को लेकर ही यमुना मुक्ति आंदोलन से जुड़े शीर्ष लोगों के बीच मतभेद गहराने लगे और लगातार बढ़ते गए। अब हाल ये है कि यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास का ध्यान अब घाटों की सफाई पर केंद्रित हैं। भाकियू भानु गुट की ताकत भी यमुना रक्षक दल से दूर होती गई। पदयात्रा में बड़ी भूमिका निभाने वाले हरेश ठेनुआ ने दल से खुद को अलग कर लिया। मान मंदिर संस्थान की भूमिका भी अब आंदोलन में उतनी सक्रिय नजर नहीं आती। यमुना रक्षक दल के संरक्षक रहे गोकुल के पंकज बाबा ने भी अपनी राह अलग कर ली और यमुना मामले में हाईकोर्ट में याची गोपेश्वर चतुर्वेदी के साथ मिलकर यमुना रक्षा मंच नाम से संगठन खड़ा कर दिया।
इस तरह से बना चुनावी मुद्दा
- लोकसभा चुनाव में सभी प्रमुख दलों के प्रत्याशियों ने इसे अपने स्थानीय घोषणापत्र में पहला स्थान दिया। भाजपा प्रत्याशी हेमामालिनी ने अपनी पहली प्रेसवार्ता ही यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के वादे के साथ की। रालोद महासचिव जयंत चौधरी ने यमुना पूजन के बाद नामांकन किया। चुनावी सभाओं में वह अपने लोकसभा में किए प्रयासों को गिनाते भी रहे। बसपा के योगेश द्विवेदी ने भी यमुना पूजन कर चुनावी अभियान को गति दी।
- भाजपा नेता नरेंद्र मोदी ने अपनी सभा की शुरुआत ही यमुना मुद्दे से की और आश्वासन दिया कि साबरमती की तरह यमुना का शुद्धीकरण किया जाएगा। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी अपने संबोधन की शुरुआत यमुना की बदहाली और निर्मल यमुना के लिए किए गए प्रयासों का जिक्र कर की। मुलायम सिंह यादव ने भी यमुना पर चर्चा की। बसपा की सभा में मायावती ने भी यमुना प्रदूषण पर चिंता जाहिर की।
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बड़े आंदोलन में लोग जुड़ते हैं लेकिन जब आंदोलन लंबा चलता है तो कुछ लोग साथ छोड़ जाते हैं। अलग होने वालों के अपने-अपने कारण हो सकते हैं। मेरा तो एकमात्र उद्देश्य यमुना का निर्मल स्वरूप लौटाना है। आंदोलन में साथ रहकर अलग हुए लोगों के कार्यों को भुलाया नहीं जा सकता।
- संत जयकृष्ण दास, अध्यक्ष यमुना रक्षक दल
पूर्व केंद्रीय मंत्री हरीश रावत के साथ हुआ समझौता अनुचित था। इससे न यमुना निर्मल होने वाली थी और न ही ब्रजवासियों की उम्मीदें सच होनी थी। उद्देश्य से भटके संगठन में रहने का औचित्य नहीं था, लिहाजा यमुना रक्षा मंच का गठन कर जमीनी स्तर पर काम किया जा रहा है। गोकुल में बहुत काम हो चुका है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से बात हुई है, सरकार बनी तो यमुना का स्वरूप बदल जाएगा।
- पंकज बाबा, गोकुल
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सारा ब्रज जानता है कि लोगों के साथ धोखा हुआ है। पदयात्रा के दौरान मार्च में जो फैसला लिया गया वह चंद लोगों की सहमति का था। आंदोलनकारियों को यह मान्य नहीं था। आंदोलनकारियों को इससे ठेस लगी। इसके बाद यमुना रक्षक दल का आंदोलन अपनी राह से भटका नजर आने लगा, इसलिए हमने अलग होने का फैसला कर लिया।
- हरेश ठेनुआ, प्रमुख महासचिव भाकियू (भानु गुट)
यमुना रक्षक दल का पंजीकरण मान मंदिर संस्थान को विश्वास में लिए बगैर कराया गया। इसमें पता भी मान मंदिर की जगह कहीं और का दिया गया है। मान मंदिर की परंपरा है यहां से किसी को अलग नहीं किया जाता। फिर यदि कोई अपना रास्ता अलग करे तो उसे कुछ नहीं कहा जाता। यमुना रक्षक दल का उद्देश्य कई बार समझ में नहीं आता और भटकाव दिखता है।
- सुनील सिंह, सचिव मान मंदिर संस्थान बरसाना
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