मांट। द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण मांट के निकट बेलवन में रास रचाने आते थे। एक बार रास रचाने के दौरान उन्होंने जब बांसुरी बजाई तो उसकी आवाज देवलोक तक पहुंची, तब महालक्ष्मी ने नारद जी से पूछा कि यह आवाज कैसी है। नारद बोले कि बेलवन में भगवान श्रीकृष्ण बांसुरी बजा रहे हैं।
इसके बाद लक्ष्मी जी बेलवन आ गईं। उन्होंने रास में प्रवेश करना चाहा पर वहां मौजूद गोपियों ने उन्हें रोक दिया। इस पर महालक्ष्मी जी ने गोपियों को भला-बुरा कह दिया। इस बात का पता जब श्रीकृष्ण को चला तो उन्होंने महालक्ष्मी जी से कहा कि यह साधारण गोपियां नहीं हैं। इन गोपियों ने हजारों वर्ष तपस्या कर रास में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त किया है। लक्ष्मी जी यदि आपको रास में शामिल होना है तो पहले हजारों वर्ष तपस्या कर गोपियों को खुश करना होगा। इसके बाद आपको रास में शामिल किया जाएगा।
मंदिर के सेवायत कृष्णा गोस्वामी ने बताया कि मान्यता है कि यहां महालक्ष्मी जी तपस्या कर रही हैं। यहां पौष माह के प्रत्येक गुरुवार को मेले लगता है। हजाराें श्रद्धालु मेले में खिचड़ी गजक, रेवड़ी का प्रसाद महालक्ष्मी जी को अर्पित करते हैं।
इसलिए पड़ा बेलवन नाम
द्वापर में इस वन में बेल के पेड़ों की प्रचुरता के कारण इस स्थान को बेलवन कहा जाता है। बेलवन वृंदावन से मात्र दो किलोमीटर दूर है।
महालक्ष्मी जी मेला 19 से
बेलवन में महालक्ष्मी जी का मेला 19 दिसंबर से लगेगा। इसमें हजारों श्रद्धालु महालक्ष्मी जी के दर्शन करने आते हैं।