मथुरा। पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान अब राष्ट्रीय मीट अनुसंधान केंद्र हैदराबाद के साथ मिलकर काम करेगा। इसके लिए दोनों संस्थानों के बीच सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। अब दोनों संस्थान रिसर्च प्रोजेक्ट के साथ अन्य क्षेत्रों में भी एक दूसरे का सहयोग करेंगे। खासकर यूपी के मीट व्यवसायी हैदराबाद के इस संस्थान में प्रशिक्षण पा सकेंगे।
वेटरिनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसी वार्ष्णेय और राष्ट्रीय मीट अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. वीवी कुलकर्णी ने रविवार को सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान डॉ. कुलकर्णी ने बताया कि संस्थान में मीट स्पेसीज की डीएनए टेक्नोलॉजी से जांच और मीट के लिंग का पता लगाने पर शोध चल रहा है। इसके अतिरिक्त मीट ट्रेसेबिलिटी मॉडल में शोध उपरांत ग्राहक द्वारा खरीदा हुआ मीट किस जानवर तथा किस क्षेत्र से आया है, इसकी जानकारी दी जा सकेगी। मीट में पाए जाने वाले पेस्टीसाइड के सही आकलन पर भी शोध हो रहा है।
बता दें कि इस एमओयू के बाद वेटरिनरी विवि को इन सभी महत्वपूर्ण रिसर्च प्रोजेक्टों में आवश्यकतानुसार शामिल किया जाएगा। विश्वविद्यालय के माध्यम से अब प्रदेश के मीट व्यापारी बेहतर मीट उत्पादन के लिए हैदराबाद में प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सकेंगे। लाइव स्टॉक प्रोडक्ट टेक्नोलॉजी में शोध करने वाले वेटरिनरी विवि के छात्रों को उच्च स्तरीय और गुणवत्तापरक कार्य करने के लिए आरएनसी हैदराबाद भी भेजा जा सकेगा। इस मौके पर वेटरिनरी विवि के कुलसचिव डॉ. भरत सिंह, डीन डॉ. एसके गर्ग, डीन स्नातकोत्तर डॉ. पीके शुक्ला, डीआर डॉ. अतुल सक्सेना, डीई डॉ. सर्वजीत यादव, एलपीटी विभागाध्यक्ष डॉ. विकास पाठक, पीआरओ डॉ. एम आनंद मौजूद थे।
तीन नेशनल इंस्टीट्यूट से हो चुका है समझौता
वेटरिनरी विश्वविद्यालय इससे पहले एनडीआरआई करनाल, आईवीआरआई इज्जतनगर, सीआईआरजी मखदमू फरह जैसे राष्ट्रीय संस्थानों के साथ भी समझौता कर चुका है।