वृंदावन। आराध्य को ठंड से बचाने के लिए भावसेवा के तहत आस्था की तपिश दी जा रही है। कोई अपने लाड़ले को रजाई ओढ़ा रहा है तो कोई उनके लिए ऊनी परिधान लाया है। मौके को भुनाने के लिए बाजार भी सज गया है। बाजार में दस रुपये से लेकर हजारों रुपये कीमत के पोशाक उपलब्ध हैं।
ठंड भले अभी गुलाबी हो लेकिन ठाकुर जी के भक्तों को उनकी चिंता सताने लगी है। उन्हें भय है कि उनका लाड़ला बड़ा नाजुक है, कहीं उसे ठंड न लग जाए। इसके लिए वह तरह-तरह के जतन कर रहे हैं। बच्चों के गर्म कपड़ों की खरीदारी से भी पूर्व ठाकुर जी के लिए ऊनी वस्त्रों की खरीदारी की जा रही है।
ब्रज की भक्ति निराली
ब्रज में मान्यता है कि भगवान भक्तों की भावनाओं के वशीभूत होते हैं। इसी भाव से भक्त अपने आराध्य को खूब रिझाते और लाड़ लड़ाते हैं। उसी भक्तिपूर्ण आत्मीय भाव से ओतप्रोत हो आज भी ठाकुर के श्रीविग्रहों की विधिपूर्वक सेवापूजा की जा रही है। इसी भावसेवा के तहत भक्त अपने आराध्य को ठंड से बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
सज गए बाजार
वृंदावन। भाव सेवा के लिए धर्म नगरी के बाजार भी तैयार हो गए हैं। मौसम सर्द हुआ तो ठाकुरजी के डिजाइन युक्त रंग बिरंगे ऊनी परिधान बाजार में आ गए। विभिन्न रंगों से निर्मित ऊनी, फेदर की पोशाकें बाजार में उपलब्ध हैं। छोटी पोशाकों और दुपट्टे दुकानों पर बिकने के लिए तैयार हैं। पोशाक व्यवसायी गोविंद अग्रवाल, कृष्ण अग्रवाल, अनुगृह शर्मा ने बताया कि ठाकुरजी की ऊनी पोशाकें दस से लेकर हजारों रुपये तक की कीमतों में उपलब्ध हैं।
करोड़ों का होगा कारोबार
वृंदावन। वृंदावन का ऊनी वस्त्र उद्योग लगातार ऊंचाई छू रहा है। पोशाक निर्माण उद्योग कुटीर उद्योग के रूप में तेजी से फल-फूल रहा है। एक आकलन के मुताबिक यह व्यवसाय करोड़ों में है। वस्त्र विक्रेता शरद शर्मा ने बताया कि यह व्यवसाय इस वर्ष लगभग कई करोड़ का होगा।