मथुरा। बासमती की महक पर महंगाई ने अंकुश लगा दिया है। किसानों की अथक मेहनत, अच्छे मौसम के बाद बंपर पैदावार तो हुई लेकिन महंगाई डायन ने बासमती को नहीं बख्शा। इसकी कीमतें खुले बाजार में बीते साल के मुकाबले डेढ़ से दोगुनी बताई गई है।
जनपद में बासमती की प्रजाति सुगंधा-दो और 1121 की बंपर पैदावार हुई है। ऐसे में लोगों को उम्मीद थी कि इस बार बासमती चावल मध्य वर्ग के अलावा गरीबों की थाली की भी रौनक बढ़ाएगा लेकिन महंगाई के डंक ने आम आदमी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। चावल कारोबारी प्रतुल अग्रवाल ने बताया इस बार धान की कीमत भी बीते वर्ष के मुकाबले दो गुने से अधिक है। इसकी वजह बाजार में निर्यातकों की जबर्दस्त मांग है। ये ही वजह है जो सुगंधा धान बीते वर्ष 1800 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा था वो इस बार 3000 से 3400 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
रूस, चीन भी बासमती के मुरीद
सरहद पर आंखें दिखाने वाले चीन के लोगों के मुंह में बासमती चावल मिठास घोल रहा है, तो रूस की रसोई में भी भारतीय बासमती महक रही है। ये दोनों ही देश विश्व बाजार में पहली बार भारत के बासमती की खरीद कर रहे हैं। इसके अलावा ईरान, ईराक, कुवैत, सऊदी अरब, यमन आदि देशों में भी पहले ही भारतीय बासमती की धमक है।
फैक्ट फाइल
जिले में 50 हजार हेक्टेअर में हुई है धान की बुवाई।
35 हजार हेक्टेअर में बासमती, 15 हजार में अन्य प्रजातियां।
जिले में 1.4 लाख मीट्रिक टन बासमती उत्पादन का अनुमान।
90 हजार मीट्रिक टन अन्य प्रजातियों के उत्पादन का अनुमान।
बीते वर्ष 50 से 75 रुपये किलो थी बासमती चावल की कीमत।
इस साल 75 से 125 रुपये किलो में मिल रहा बासमती चावल।