मथुरा। सरकारी खरीद केंद्रों को गेहूं खरीद का लक्ष्य हासिल करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ेगा। दरअसल, पहले सरकारी केंद्रों पर अव्यवस्थाओं और कई केंद्रों के चालू न होने के चलते किसान वहां नहीं जा रहे थे। वहीं अब खुले बाजार की कीमतें किसानों को अपनी ओर खींच रही हैं। ऐसे में अधिकारियों को खरीद लक्ष्य हासिल करने के लिए पसीना बहाना होगा।
इस बार जनपद में गेहूं का रकवा 1.93 लाख हेक्टेअर है। ऐसे में 73.34 लाख क्विंटल उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है। इस पर सरकार ने जनपद में खरीद का लक्ष्य 6.95 लाख क्विंटल निर्धारित किया है। इसके लिए कुल 98 क्रय केंद्र खोले गए हैं। इसमें पीसीएफ के 76, मार्केटिंग विभाग के छह, यूपी स्टेट एग्रो के पांच, नैफेड के दो तथा एनसीएफ के तीन, एनएनएस के दो तथा एफसीआई के चार क्रय केंद्र हैं। सोमवार तक इन केंद्राें पर मात्र 1458.6 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो सकी है।
बाजार के जानकार बताते हैं कि बीते दो दिनों में मंडियों में गेहूं की कीमतों में 20 से 30 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई है। वर्तमान में भाव 1330 से बढ़कर 1350 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। वहीं सरकारी क्रय केंद्रों पर भी 1350 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद की जा रही है। हालांकि इसमें मजदूरी के नाम पर 10 से 15 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती भी हो रही है। ऐसे में किसानों को मंडियां ही मुफीद लग रही हैं।
...तो फिर क्यों झंझट में पड़ें
मथुरा (ब्यूरो)। किसान प्रमोद सिंह बताते हैं कि सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों को चेक के माध्यम से भुगतान किया जाता है। इसमें किसानों को पैसा मिलने में 4-5 दिन तक लग जाते है। वहीं बाजार में नकद भुगतान मिलता है। ऐसे में कोई क्यों इस झंझट में पड़ेगा। वहीं रघुवीर सिंह का कहना है कि जब सरकारी क्रय केंद्र की कीमतें खुले बाजार में मिलेंगी तो फिर किसान मंडियों को ही पहले प्राथमिकता देंगे।