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....सरकार कू सबक सिखायेंगे

Sun, 24 Feb 2013 05:30 AM IST
Mathura
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(गुजरात के लिए महत्वपूर्ण)
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अजय शर्मा
नौहझील। अब समय हमारौ आया है, जो दिल्ली तक पहुंचायो है, हथिनी कुंड पै जाएंगे, यमुना मैया ऐ लाएंगे..., लोकगीत यमुना मुक्ति की अलख जगा रहे हैं। यमुना रक्षक दल के कार्यकर्ता इन लोकगीतों को सुनाकर जन-जन से एक मार्च की पदयात्रा में भाग लेने का आह्वान कर रहे हैं। नौहझील में आजकल इन लोकगीतों की गूंज है।
यमुना मुक्ति अभियान से देहात में लोगों का जुड़ाव निरंतर बढ़ रहा है। यमुना रक्षक दल के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोकगीतों के माध्यम से लोगों को जागृत कर रहे हैं। यमुना मुक्ति आंदोलन में एक मार्च को होने वाले दिल्ली कूच के लिए लोगों से संकल्प ले रहे हैं।
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इस अभियान में शामिल बृज के रसिक हरीचंद पाठक ब्रजभाषा में लोकगीत सुनाते हुए लोगों को जोड़ रहे हैं। उन्हें सुनने के लिए ग्रामीणों का समूह उमड़ रहा है। लोकगीत की पंक्तियां हैं- ‘हम जब ही खाना खाएंगे, यमुना कू शुद्ध कराएंगे वही अपनी जान गवाएंगे, अब समय हमारौ आयौ है जो दिल्ली तक पहुंचायो है’। हम हथिनी कुंड पै जायेंगे, मैया को मुक्त कराएंगे, सब दरवाजे खुलवाएंगे। झंडा हाथ उठायौ है, जो दिल्ली तक पहुंचायौ है। कवि हरीचंद अब गाय रहे, छेदालाल समझाय रहे, नित गांव-गांव में जाय रहे। नौहझील गांव बतलायौ है जो दिल्ली तक पहुंचायौ है।
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ये पंक्तियां युवा वर्ग में जोश का संचार कर रही हैं। यमुना मुक्ति के लिए युवा शक्ति हिलोरे ले रही है। युवा वर्ग के होठों पर भी अब यही बोल हैं, ‘मैया की कैद छुडाएेंगे, एक मार्च से दिल्ली जाएंगे, सरकार कू सबक सिखायेंगे, चाहे कटि जाय धड़ ते नारि।’ नौहझील ब्लॉक के सभी गांवों में यमुना को मुक्त कराने का आंदोलन बड़ा रूप ले चुका है।
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