गोवर्धन। विश्वविख्यात श्रीरामकथा वाचक मुरारी बापू ने कहा कि घर में गाड़ी रखने को जगह है लेकिन एक गाय के लिए जगह नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि या तो सामर्थ्यवान लोग कुछ गाय दत्तक लें या फिर गोपालक किसानों को दाने चारे की व्यवस्था करें। उन्होंने सियासतदारों की ओर इशारा करते हुए कहा कि तीन गायों का पालन करे उसी को मंत्री बनाना चाहिए। बाद में वह कथा पंडाल में बैठे लोगों से शायरना अंदाज में बोले कि कोई करे न करे सियासत जाने, अपना पैगाम मुहब्बत है।
सूरश्याम गौशाला में आयोजित गोकल्याण महा-महोत्सव में द्वितीय दिन रविवार को मुरारी बापू ने कहा कि
गाय की रक्षा के लिए हम संतों को निकलना पड़ा है। विनोबा जी ने गौ रक्षा के लिए अपने प्राण दिए। सरकारों ने अगर गौ रक्षा की होती तो विनोबा जी को मरणोपरांत भारत रत्न देने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि ओशो ने लिखा था कि डार्विन ने मनुष्य के पूर्वजों को बंदर बताया। यह बात मुझे (ओशो) रास नहीं आई लेकिन यह बात पसंद आई कि गाय हमारी माता है। गाय की आंखें हमसे मिलती हैं। सुरधेनु स्वर्ग की गाय है। उसे कामधेनु भी कहते हैं। सुरधेनु शब्द विश्वास, श्रद्धा और भरोसे का प्रतीक है।
बापू ने गौ सेवा की बात करने वाले लोगों के लिए कहा कि वह केवल दूसरों को प्रेरणा देने की बात कहते हैं लेकिन गाय रखते नहीं। उन्होंने कहा कि दूसरे के कपाल पर चंदन लगाने के लिए आपकी अपनी (खुद) की उंगली चंदन में डुबोनी होगी। कथा श्रवण करने वालों में कार्ष्णि गुरु शरणानद महाराज, श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के ट्रस्टी यदुहरि डालमिया सपत्नीक, गीतानंद महाराज, ज्ञानानंद जी महाराज, संजीव कृष्ण ठाकुर जी, राधाकृष्ण महाराज, सुरेश शर्मा श्रीकृष्ण जन्मस्थान के सचिव कपिल शर्मा आदि प्रमुख थे।
पांच हजार वर्ष बाद कलियुग में गौचारण लीला
गोवर्धन (ब्यूरो)। ब्रज में भारतीय गौ कल्याण महा-महोत्सव के अंतर्गत पहली बार 21 नवंबर को सूरश्याम गोशाला चंद्रसरोवर पारसौली में गोपाष्टमी के अवसर पर ब्रज क्षेत्र की गायों का विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
गोपाष्टमी के अवसर पर बुधवार 21 नवंबर को प्रात: 11 बजे गौ पूजन होगा। इसके उपरांत ब्रज की गौमाता यज्ञ स्थल पर विराजमान हाेंगी। उनको गौ भक्त भंडारे में बनी सामग्री को खिलाया जाएगा। इस कार्य के लिए गौ सेवक गांवों से बुलाए गए हैं। यह गो चारण लीला भगवान श्री कृष्ण ने पांच हजार वर्ष पूर्व की थी। कलियुग में प्रथम बार यह लीला देखने को मिलेगी। उस दिन 108 गौ माता व कृष्ण-बलराम के स्वरूप में ब्रज के बालक सैकड़ों की संख्या में चंद्रसरोवर सूरश्याम गौशाला से रवाना होकर परिक्रमा मार्ग में गौचारण करेंगे।