कोसीकलां (मथुरा)। छाता और कोसी में संचालित ढाबों से बुधवार सुबह राज्य बाल आयोग के निर्देश पर काम कर रही मिशन मुक्ति फाउंडेशन की टीमों ने जबरन देह व्यापार में लगीं तीन नाबालिग समेत छह युवतियों को मुक्त कराया है। बरामद सभी लड़कियां बदहवास स्थिति में मिलीं। टीम ने 7 आरोपियों को भी पकड़ा है।
जानकारी के अनुसार झारखंड से एक 15 वर्षीय किशोरी को कुछ लोग काम के बहाने दिल्ली ले आए थे। जिसके बाद वह लापता हो गई। किसी तरह से उसने बेंगलुरु में रह रही बहन से संपर्क कर आपबीती बताई। हालात को समझते हुए वह उसे खोजते हुए दिल्ली पहुंची और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी संस्कार आश्रम दिल्ली से संपर्क कर अपनी शिकायत सदस्य रूपसुदेश विमल को दी।
किशोरी ने बहन के बताए आधार पर कोटवन बाॅर्डर के होटल-ढाबों पर होने का शक जताया। विमल ने उत्तर प्रदेश राज्य बाल आयोग की निगरानी में मिशन मुक्ति फाउंडेशन की टीम के साथ ग्राहक बनकर रेकी की।
टीम को उक्त किशोरी उसी होटल पर होने की सूचना मिली तो उन्होंने सीओ गौरव त्रिपाठी से मुलाकात कर कार्रवाई को कहा। टीम ने सीओ को साथ लेकर कोटवन स्थित ढाबा पर कार्रवाई कर वहां से दो नाबालिग किशोरी समेत एक युवती बरामद कर कारोबार में जुटे तीन लोगों को पकड़ लिया है।
दूसरी कार्रवाई में छाता से टीम ने एक नाबालिग किशोरी सहित दो युवतियों को बरामद कर चार लोगों को पकड़ा है। फाउंडेशन के डायरेक्टर वीरेंद्र सिंह एवं अमित कुमार ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा। प्रभारी निरीक्षक अनुज कुमार राणा ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। तहरीर के आधार पर कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
टालना पड़ी थी कार्रवाई
ढाबों पर कार्रवाई की सूचना लीक होने से ढाबा संचालकों ने लड़कियों को वहां से हटा दिया था। जिसके चलते टीम को यह कार्रवाई टालनी पड़ी। टीम ने दोबारा रेकी कर सूचना को पुख्ता कर अचानक कार्रवाई की।
विरोध करने पर मिलती थी सजा
देह व्यापार की मना करने पर युवतियों को सजा दी जाती थी। मिशन मुक्ति फाउंडेशन के डायरेक्टर वीरेंद्र सिंह ने बताया कि यहां उसे दीपक एवं दुर्गा नामक व्यक्ति प्रताड़ित करते थे। वो उसके साथ अनैतिक कार्य ही नहीं उसे मारते-पीटते भी थे।