अडींग वही गांव हैं, जहां ब्रिटिश हुकूमत ने ब्रज क्षेत्र मेें 1857 की क्रांति को कुचलने के लिए 57 ग्रामीणों को फांसी पर चढ़ा दिया था। गांव के लोगों के साथ महीनों तक बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया। हंसते-हंसते मौत को गले लगाने वाले आजादी के दीवानों की इस कुर्बानी की गवाह भरतपुर नरेश सूरजमल की हवेली अब भी खंडहर के रूप में यहां मौजूद है।
मथुरा-गोवर्धन मार्ग स्थित गांव अडींग जनपद में सर्वाधिक आबादी वाले गांवों में शुमार है। धार्मिक दृष्टि से यह गांव अरीठ वन के निकट बसे होने एवं श्रीकृष्ण द्वारा यहां दान लेने की लीलाओं से महत्वपूर्ण है। लेकिन, यहां के लोगों द्वारा स्वाधीनता आंदोलन में दिया योगदान आज भी लोगों के लिए गौरव का विषय है। 1857 की क्रांति के बाद भी भारत की आजादी की जंग में स्वतंत्रता सेनानी लाला जगन प्रसाद गुप्ता, पंडित ललित बिहारी जैसे लोगों ने इस गांव को जनपद में पहचान दिलाई। अड़ींग से आजादी के आंदोलनों की बढ़ती संख्या के कारण ब्रिटिश हुुकूमत ने यहां चौकी की स्थापना कर दी थी।
सुधार की जरूरत
-काफी मशक्कत के बाद अड़ींग को नहीं मिल सका नगर पंचायत का दर्जा
-ब्रज चौरासी कोस में अड़ींग स्थित किलोलकुण्ड आचमन योग्य नहीं है
-रमणीय स्थत कमल कुण्ड तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता नहीं है
-सफेद हाथी बना आगरा व मेरठ मंडल का मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केन्द्र
खासियत
-जनपद की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में शुमार है अड़ींग
-मथुरा-गोवर्धन मार्ग पर स्थित है यह गांव
-कभी परगना तहसील होती थी अड़ींग