शस्त्र लाइसेंस के पांच हजार आवेदन रद्दी हो गए हैं। इन सभी को एक्सपायरी की श्रेणी में रख दिया गया है। ये सभी वे आवेदन हैं जो लाइसेंस के लिए छह महीने से थानों से लेकर तहसील तक के चक्कर काटकर असलाह आफिस पहुंचे थे।
अब शस्त्र लाइसेंस बनवाना आसान नहीं रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन केवल उन्हीं के लाइसेंस जारी कर सकता है जिन्हें नितांत आवश्यकता है। कुल मिलाकर डीएम के विवेक पर छोड़ा गया है। लेकिन तमाम कड़े मानकों के बावजूद असलहे का प्यार कम नहीं हो रहा है।
शस्त्र लाइसेंस के लिए अभी भी लोग दौड़भाग कर रहे हैं। बुधवार को कलक्ट्रेट पर अपने लाइसेंस के संबंध में जानकारी करने पहुंचे मांट के सुभाष सिंह का कहना था कि पहले तो आवेदन महीने भर थाने में ही पड़ा रहा। वहां से निकला तो तहसील में रुक गया। तमाम जांच रिपोर्ट लगवाई। इसी बीच छह माह का वक्त हो गया। अब कह रहे हैं कि आवेदन को एक्सपायरी की श्रेणी में रख रहे हैं। कह रहे हैं कि अब नए फार्मेट पर आवेदन करना होगा।
मथुरा के कोतवाली क्षेत्र के जगत सिंह भी पिछले कई माह के रिवाल्वर के लाइसेंस के लिए परेशान हैं। जब तक सभी जगह से रिपोर्ट लगी तब तक छह माह का वक्त बीत गया। अब दोबारा से आवेदन करने को कहा जा रहा है। पैसा तो खर्च होता ही है। फीस जमा कराई जाती है। भागदौड़ करनी पड़ती है। वरना थाने और तहसील में कौन रिपोर्ट लगाकर दे रहा है।
सिटी मजिस्ट्रेट रामअरज यादव का कहना है कि भारत सरकार ने शस्त्र लाइसेंस के लिए नया प्रारूप जारी कर दिया है। अब उसी प्रारूप पर लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा। उन्होंने बताया कि किसी भी लाइसेंस फार्म पर जो रिपोर्ट थाने या तहसील की लगती है वह छह माह के लिए ही मान्य मानी जाती है। इसके बाद थाने या तहसील से दोबारा रिपोर्ट कराई जाती है।